नई दिल्ली। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-1) ने सोमवार को देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुए कथित दमन को लेकर “मानवता के खिलाफ अपराध” के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि हसीना “कड़ी सजा की हकदार” हैं।ट्रायल अनुपस्थिति में (in absentia) हुआ, क्योंकि हसीना बीते वर्ष देश छोड़ने के बाद वर्तमान में भारत में रह रही हैं। न्यायालय ने माना कि छात्र आंदोलन के समय सरकारी कार्रवाई में हिंसा, घातक हथियारों का उपयोग और इलाज रोकने जैसी गंभीर घटनाएँ हुईं। आरोप है कि इन कार्रवाइयों में हजारों लोग घायल हुए, जबकि बड़ी संख्या में मौतें भी दर्ज की गईं।फैसले के बाद ढाका में हाई-अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा बलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है।
राजधानी में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते ‘शूट-एट-साइट’ जैसे सख्त आदेश भी लागू हैं।शेख हसीना ने आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। वह लगभग 15 वर्षों तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं और 2024 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बाहर हो गई थीं।अदालत जल्द ही सजा का एलान करेगी, जिसके कड़े होने की संभावना जताई जा रही है। यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है और इसके क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
