बागपत। बेरोजगार युवाओं को सरकारी और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर साइबर गिरोह का बागपत पुलिस ने खुलासा किया है। यह गिरोह बीते करीब छह वर्षों से सक्रिय था और देश के कई राज्यों के युवाओं को अपना शिकार बना चुका था। पुलिस ने गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी नौकरी डॉट कॉम और ओएलएक्स जैसे लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर फर्जी जॉब विज्ञापन पोस्ट करते थे। विज्ञापन इतने आकर्षक और भरोसेमंद होते थे कि बड़ी संख्या में बेरोजगार युवक-युवतियां आवेदन कर देते थे। जैसे ही कोई उम्मीदवार आवेदन करता, उसकी जानकारी सीधे गिरोह द्वारा संचालित कॉल सेंटर तक पहुंच जाती थी।इसके बाद कॉल सेंटर में बैठी युवतियां और युवक आवेदकों से फोन पर संपर्क कर उन्हें चयन प्रक्रिया, सैलरी पैकेज और पोस्टिंग की जानकारी देते थे। शुरुआती तौर पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे 2150 रुपये ट्रांसफर कराए जाते थे।
इसके बाद शपथपत्र, फाइल चार्ज और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पांच हजार से लेकर दस हजार रुपये तक अलग-अलग खातों में जमा कराए जाते थे।कुछ दिन बाद पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी नौकरी पक्की हो गई है। इसके बाद ईमेल के माध्यम से बैंक या किसी प्रतिष्ठित कंपनी का फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिया जाता था। नियुक्ति पत्र में किसी भी जिले की बैंक शाखा या कंपनी का नाम अंकित होता था, जिससे युवाओं को शक न हो। इसके बाद एक और कॉल कर यह कहा जाता था कि दिल्ली मुख्यालय से नियुक्ति में कोई तकनीकी गड़बड़ी सामने आई है और मामला ठीक करने के लिए इंतजार करना होगा। इसी के बाद पीड़ितों के फोन नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिए जाते थे।पुलिस के अनुसार, अधिकांश युवाओं से 20 से 25 हजार रुपये तक की ठगी की गई। इस तरह हजारों लोगों से रकम ऐंठकर गिरोह ने करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार खड़ा कर लिया था।मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत सरकार के प्रतिबिंब पोर्टल पर जिले से जुड़े दो मोबाइल नंबरों के जरिए साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें संदिग्ध मोबाइल नंबर, बैंक खाते और कॉल डिटेल सामने आईं।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश तेज कर दी।रविवार सुबह ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर मवीकलां के पास घेराबंदी कर पुलिस ने गिरोह के सरगना अनुज समेत सात आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अनुज निवासी ख्वाजा नंगला (हाल निवासी न्यू अशोक नगर, पूर्वी दिल्ली), शिवानी निवासी बेगराजपुर जिला मुजफ्फरनगर, आशा निवासी सेक्टर-41 नोएडा, मोहित, पुनीत, वरदान निवासी बड़ौत और अक्षय निवासी सोंटा अलीपुर जिला शामली शामिल हैं।आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 6450 युवाओं को भेजे गए फर्जी नियुक्ति पत्र, 12 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, दो लैपटॉप, 15 बैंक पासबुक, चेकबुक समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इन नियुक्ति पत्रों पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान सहित कई राज्यों के युवाओं के नाम दर्ज हैं।पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मुख्य संचालक अनुज है, जो इससे पहले वर्ष 2018 में भी बागपत और दिल्ली से इसी तरह की ठगी के मामलों में जेल जा चुका है।
पहले वह केवल मोबाइल कॉल के जरिए ठगी करता था, लेकिन कोरोनाकाल के दौरान उसने बाकायदा कॉल सेंटर खोलकर अपने नेटवर्क को और मजबूत कर लिया।पुलिस का कहना है कि जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि फर्जी नियुक्ति पत्र भेजने के अलावा भी हजारों युवाओं से अलग-अलग तरीकों से ठगी की गई है। बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डाटा के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।एसपी बागपत सूरज कुमार राय ने बताया कि यह एक संगठित साइबर ठगी का मामला है और इसमें शामिल सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन नौकरी के विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करें और बिना सत्यापन के किसी भी खाते में पैसा ट्रांसफर न करें। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक भी जल्द पहुंचा जाएगा।
