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नई दिल्ली, 11 फ़रवरी । आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि औषधीय पौधे भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की आधारशिला ही नहीं बल्कि देश की जैविक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आयुर्वेद और अन्य आयुष पद्धतियों को मिल रही वैश्विक मान्यता भारत को गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने का अवसर प्रदान करती है। बुधवार को राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) द्वारा विज्ञान भवन में औषधीय पौधों पर एक दिवसीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह चिंतन शिविर ‘विकसित भारत 2047’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है। औषधीय पौधों का क्षेत्र किसानों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं के लिए नई संभावनाएं खोलता है, विशेषकर वर्षा आधारित और सीमांत भूमि पर खेती के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में सहायक है।

इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। शिविर का उद्देश्य औषधीय पौधों के क्षेत्र को सतत विकास, नवाचार और प्रभावी नीतियों के माध्यम से सशक्त बनाना रहा।

इस अवसर पर मंत्री ने एनएमपीबी के 25 वर्ष पूर्ण होने पर स्मारिका का विमोचन किया, ‘टेरिस गार्डन पुस्तिका’ जारी की तथा सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ द्वारा विकसित एनासाइलस पाईरीथ्रम की नई किस्म का लोकार्पण किया। साथ ही, एनएमपीबी और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद तथा अघारकर अनुसंधान संस्थान के बीच अनुसंधान सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी हुए।

इस अवसर पर

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि एनएमपीबी की रजत जयंती उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ आत्ममंथन और नवाचार का अवसर भी है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, ट्रेसबिलिटी और जलवायु-सहिष्णुता पर जोर देते हुए कहा कि आगामी पांच वर्षों के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र अधिक उत्पादक, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।

अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार होवेदा अब्बास ने परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वित्तीय अनुशासन और समय पर निधि आवंटन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से नवाचारपूर्ण वित्तीय मॉडल अपनाने और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

एनएमपीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश कुमार दधीच ने बताया कि यह चिंतन शिविर पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड संरक्षण, क्षमता निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ खेती से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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