सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रविनारायण आचार्य ने इस पहल पर अपने विचार साझा करते हुए युवा आयुर्वेद शोधकर्ताओं को सशक्त वैज्ञानिक लेखन क्षमताओं के साथ सशक्त बनाने के महत्व पर ज़ोर दिया।

प्रो. रविनारायण आचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “सीसीआरएएस-प्रयत्न पहल, उच्च-गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक प्रकाशन के लिए आवश्यक कौशल से युवा विद्वानों को सशक्त बनाकर आयुर्वेद में एक मज़बूत शोध संस्कृति को पोषित करने की हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और सुव्यवस्थित मार्गदर्शन के माध्यम से, प्रयत्न स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट के विद्वानों को वैश्विक मानकों के अनुरूप अपने शोध को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने के लिए सक्षम बना रहा है। पहले सत्र के उत्साहजनक परिणाम इस युक्ति के महत्व की पुष्टि करते हैं और हमें विश्वास है कि आगामी कार्यशालाएं विश्व भर में आयुर्वेद अनुसंधान की उपस्थिति और प्रभाव को और बढ़ाएंगी।”

अगस्त 2024 में शुरू की गई प्रयत्न कार्यशाला श्रृंखला, अकादमिक अनुसंधान और वैश्विक प्रकाशन मानकों के बीच की खाई को पाटकर आयुर्वेद में अनुसंधान इको-सिस्टम को मज़बूत करने का एक अग्रणी प्रयास है । कार्यशाला के मुख्य उद्देश्यों में वैज्ञानिक लेखन दक्षताओं का निर्माण, अनुसंधान की दृश्यता में वृद्धि तथा प्रकाशन की तत्परता में सुधार करना शामिल है, जो अंततः आयुर्वेद में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त साक्ष्य आधार में योगदान देगा। इच्छुक आयुर्वेद संस्थान 15 अगस्त, 2025 तक ccrasprayatna@gmail.com पर अभिरुचि अभिव्यक्ति (ईओआई) प्रस्तुत करके आगामी प्रयत्न कार्यशाला के आयोजन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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