औरैया, 11 अक्टूबर । चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, जो औरैया, इटावा, जालौन और धौलपुर जैसे शहरों के बाद ग्वालियर में बीते 16 वर्षों से लगातार आयोजित होता आ रहा है, इस वर्ष भी सिनेप्रेमियों के लिए नई सौगात लेकर आ रहा है। आगामी 13 और 14 अक्टूबर को जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के गालव सभागार में दो दिवसीय चंबल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष की थीम ‘सिनेमा और पर्यटन’ रखी गई है।

यह आयोजन चंबल संग्रहालय, पंचनद और स्कूल ऑफ स्टडीज इन टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट, जीवाजी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह प्रातः 10 बजे शुरू होगा।

फिल्म समारोह में चार प्रमुख सत्र होंगे। इनमें ‘फिल्म पर्यटन: उभरती जरूरतें और नई चुनौतियां’, ‘चंबल की कहानी, परम्परा, कॉपीराइट और सिनेमा’, ‘पर्यावरण और रोजगार के अवसर’ तथा ‘फिल्म पर्यटन नीति और चंबल अंचल में फिल्म निर्माण’। दो दिनों तक चलने वाले इन सत्रों में देश के जाने-माने विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इसके साथ ही चंबल अंचल पर केंद्रित पुस्तक और फोटो प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा फिल्म मेकिंग वर्कशॉप का भी आयोजन किया जाएगा।

फेस्टिवल में ज्यूरी द्वारा चयनित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय फिल्मों का प्रदर्शन होगा। जिनमें द फ़र्स्ट फ़िल्म, लॉर्ड्स सिग्नल, प्रभात फेरी, नॉट, रोज़ द शीन, अशोका रोड, अनसुनी चीखें, तुमि रोबे निरोबे, ब्रिज-माय लिटिल फ्रेंड्स, बेसिक 100 सॉन्ग्स, शॉर्टकट, आर्य भार्गवन्स ड्राइविंग टेस्ट, लॉस्ट लैटर्स, टारगेट, यू.एन.एस., अमिदा, रिवाइवल, फादर्स डे: पापा और यादें, नो स्मोकिंग, शाला सुटली, बेटर टुमॉरो, रंग बदलती दुनिया जैसी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। श्रेष्ठ फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार और सम्मान दिए जाएंगे।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार आचार्य, फेस्टिवल चेयरमैन फिल्म निर्माता-निर्देशक डॉ. मोहनदास, आईजी अरविंद सक्सेना, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार, विधायक घनश्याम चंद्रवंशी, अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपेन्द्र सिंह कुशवाह, जिला पंचायत अध्यक्षा कामना भदौरिया, फिल्म निर्मात्री चारु शर्मा, पर्यटन विभागाध्यक्ष प्रो. राधा तोमर, फिल्मकार राजनी आचार्य, फिल्म कंसल्टेंट प्रदीप चंदिरमानी, कहानीकार सुमित सिंह, सामाजिक उद्यमी हनुमंत सिंह तोमर, निर्देशक अर्जुन सिंह, पर्यावरणविद दुर्गा शरण दुबे और चंबल संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।

फिल्में देखिए, सीखिए और चंबल को नए नजरिए से जानिए— यही इस फिल्म समारोह का उद्देश्य है। 2010 में शुरू हुआ यह अभियान अब चंबल की पहचान बन चुका है। यह सिर्फ एक सिनेमाई आयोजन नहीं बल्कि चंबल अंचल की अनगढ़ सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव है। चंबल, जिसने कभी अनेक दिग्गज फिल्मों की शूटिंग देखी, अब फिल्म पर्यटन का उभरता केंद्र बनता जा रहा है।

महोत्सव में जर्मनी, नीदरलैंड्स, डेनमार्क, इटली, यूके, यूएसए, ईरान, पोलैंड जैसे देशों की फिल्में अंग्रेज़ी, डच, स्पैनिश, ग्रीक भाषाओं में और भारतीय भाषाओं हिंदी, मराठी, उड़िया, असमिया में प्रस्तुत की जाएंगी। हर फिल्म समाजिक संदेशों और मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित होगी।

यह आयोजन न केवल स्वतंत्र और उभरते फिल्म निर्माताओं को मंच देता है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का अवसर भी प्रदान करता है। ज्यूरी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं, जो फिल्मों का मूल्यांकन कर पुरस्कार देंगे।

फेस्टिवल संयोजक देवी सिंह राठौर और चंबल संग्रहालय के निदेशक चंद्रोय सिंह चौहान का कहना है कि “चाहे आप फिल्ममेकर हों, छात्र, सिनेप्रेमी या बस कहानियों के शौकीन, चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आपको एक अविस्मरणीय अनुभव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता है।

बिना किसी स्पॉन्सरशिप के 16 वर्षों की कठिन यात्रा ने इस उत्सव को चंबल की आत्मा से जोड़ा है। उबड़-खाबड़ ज़मीन की तरह संघर्षपूर्ण, लेकिन सिनेमा और संस्कृति की गहराई से भरी हुई।

By editor

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