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नई दिल्ली, 19 मार्च । लोकतंत्र सेनानी संघ आगामी 21 मार्च को नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी सभा कक्ष में ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ का आयोजन करेगा। यह दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में आपातकाल के अंत और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

इस दौरान सेनानी संघ दिल्ली की मुख्यमंत्री को 25 हजार लोगों के हस्ताक्षरों वाला एक ज्ञापन सौंपेगा। ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आरएसएस के वरिष्ठ प्रचार इंद्रेश कुमार रहेंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय सलाहकार अश्विनी कुमार चौबे ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि पार्टी ने हमेशा वंशवाद को बढ़ावा दिया है जिसके कारण देश में अराजकता की स्थिति पैदा हुई।

पूर्व मंत्री ने बताया कि हम 21 मार्च को ‘लोकतंत्र विजय दिवस’ मना रहे हैं लेकिन हमारे लिए रोज ही लोकतंत्र का विजय है। हमारे लिए लोकतंत्र नस-नस में भरी हुई है। हमारा उद्देश्य नई पीढ़ी को जागरूक करना है ताकि भविष्य में फिर से कोई शासक ऐसी घटना को ना दोहराए।

चौबे ने कहा, “कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने और एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश का विभाजन कराया। लोकतंत्र को समाप्त कर फासीवादी प्रवृत्ति और तानाशाही लाने का प्रयास किया। कांग्रेस ने राजनीति में अपराधियों का प्रवेश कराया और बाद में राजद जैसे दलों ने इसका अनुसरण किया।”

उन्होंने बताया कि आपातकाल की स्थिति इसलिए आई क्योंकि उन्होंने अवसरवादिता को जन्म दिया। कांग्रेस के लोगों ने राजनीति में अपराधियों का राजनीतिकरण किया और राजनीति का अपराधीकरण पहले कांग्रेस ने किया। बाद में राजद जैसे कई दलों ने लोकतंत्र को समाप्त करने का प्रयास किया।

पूर्व सांसद एवं आपातकाल के बंदियों के संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी ने बताया कि उनकी सरकार से तीन मुख्य मांगें हैं। इनमें आपातकाल को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान पत्र दिया जाए और संविधान हत्या की जांच की जाए शामिल है।

उन्होंने कहा 25 जून 1975 की रात को लगाया गये आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का ‘अंधकार युग’ बताया जिसमें लाखों लोगों को जेल में डाला गया और मीडिया की स्वतंत्रता छीन ली गई थी।

वहीं सैनानी संघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष राजन ढींगड़ा ने बताया कि कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी, सांसद, विधायक और विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा देश के 14 राज्यों से प्रतिनिधि शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मिलने के दौरान हम मांग रखेंगे कि दिल्ली के शिक्षा बोर्ड में भी आपातकाल के अध्याय को जोड़ा जाए। सैनानी संघ ने इस संबंध में दिल्ली विधानसभा के सदस्यों को भी पत्र प्रेषित कर उनके सहयोग और पहल की अपेक्षा की है।

By editor

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