विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस एप का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों के लिए स्क्रीनिंग, इंटरवेंशन और पोस्ट-इंटरवेंशन फॉलोअप उपलब्ध कराना है।

यह एप वेब-आधारित है और व्हाट्सऐप के माध्यम से भी सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें छात्रों को 24×7 वर्चुअल और ऑफलाइन कंसल्टेशन की सुविधा मिलेगी।

एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार ने बताया कि “नेवर अलोन” सेवा एम्स दिल्ली द्वारा सभी एम्स संस्थानों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसे ग्लोबल सेंटर ऑफ इंटीग्रेटिव हेल्थ के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य संस्थानों में छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की लागत सिर्फ 70 पैसे प्रति छात्र प्रतिदिन होगी। डॉ. कुमार ने कहा कि आत्महत्या रोकी जा सकती है, लेकिन उपचार न लेने की प्रवृत्ति बड़ी बाधा है। लगभग 70-80 प्रतिशत मानसिक रोगी इलाज नहीं कराते। इसका बड़ा कारण जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल करीब 7.27 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। यानी हर दिन लगभग 1,925 मौतें, औसतन हर 45 सेकंड में एक आत्महत्या। भारत में 2022 में 1,70,924 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जो पिछले 56 वर्षों में सबसे अधिक है। इनमें 18-30 वर्ष के युवा 35 प्रतिशत और 30-45 वर्ष आयु वर्ग के 32 प्रतिशत व्यक्ति शामिल हैं।

By editor

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