आयुष मंत्रालय के अनुसार इस पहल के कई लाभ हैं। इसमें गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के तहत सुव्यवस्थित और दोहराने योग्य प्रयोगात्मक प्रक्रियाएँ, पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाएं, जिनमें अपशिष्ट न्यूनकरण और ऊर्जा उपयोग का अनुकूलन शामिल है।

इस अवसर पर एआईआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने कहा कि यह आईएसओ प्रमाणन एआईआईए के लिए गर्व का क्षण है और यह शिक्षा, अनुसंधान तथा संस्थागत सुशासन में उत्कृष्टता की हमारी सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पारंपरिक आयुर्वेदिक अनुसंधान प्रणाली को वैश्विक रूप से मान्य आईएसओ मानकों के साथ एकीकृत करना गुणवत्ता, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाता है। यह भारत भर के आयुर्वेद संस्थानों के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का एक नया मानक स्थापित करता है, जबकि हमारी प्राचीन विरासत को भी संजोए रखता है।

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