कानपुर, 12 मार्च (हिस.)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स के समावेशन से जीवन विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आ रहा है। इन तकनीकों ने जीनोमिक्स, ड्रग डिस्कवरी, प्रिसिजन मेडिसिन और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में नए अवसर खोले हैं। यह बातें गुरुवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।
स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन देश-विदेश के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। कुलपति ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन वैज्ञानिक संवाद और सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ युवा वैज्ञानिकों को नई तकनीकों पर आधारित समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रो-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने बायोइकोनॉमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संदर्भ में स्वदेशी डेटा तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि डॉ. अजीत कुमार शासनी, निदेशक सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने पौधों में पाए जाने वाले बायोएक्टिव यौगिकों की भूमिका और मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खाद्य पदार्थों के महत्व पर चर्चा की।
सम्मेलन में अमेरिका की मिसौरी यूनिवर्सिटी के डॉ. मिन सू ने एडवांस्ड क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तकनीक पर कीनोट व्याख्यान दिया। वहीं रूस, हैदराबाद, पुणे और करनाल से आए वैज्ञानिकों ने भी विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए।
पहले दिन 12 मौखिक प्रस्तुतियां और करीब 40 शोध पोस्टरों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें 200 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। सम्मेलन का पहला दिन वैज्ञानिक चर्चाओं और शोध संवाद के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
