पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जन मंच के संयोजक/अध्यक्ष अधिवक्ता अजय चौधरी के नेतृत्व में चार घोड़ा गाड़ी सहित अधिवक्ताओं द्वारा ‘पश्चिमी उत्तर प्रदेश हमारा है’ -‘पश्चिमी उत्तर प्रदेश लेकर रहेंगे’, ‘वही दिल्ली पर राज करेगा जो पश्चिम उत्तर प्रदेश को पृथक राज्य बनाएगा’ आदि के नारे लगाते हुए रथ यात्रा प्रारंभ की गई जो एमजी रोड पर स्पीड कलर लैब के निकट पहुंचते ही पुलिस द्वारा रोके जाने पर, यात्रा में सम्मिलित अधिवक्ताओं द्वारा सड़क पर बैठकर धरना/प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई। धरना स्थल पर ही मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित ज्ञापन एसीएम प्रथम को दिया गया।

ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है l यहां से सर्वाधिक सांसद विधायक निर्वाचित होते हैं। कानून व्यवस्था के हिसाब से इतने बड़े प्रदेश को सही तरीके से नहीं चलाया जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक भाग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक भाग से उच्च न्यायालय के लिए 700 किलोमीटर से ऊपर की दूरी तय करनी पड़ती है जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय नजदीक हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश से उच्च न्यायालय की लम्बी दूरी के कारण जनता को सस्ता व सुलभ न्याय नहीं मिल पाता है तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का समूचा विकास भी नहीं हो पा रहा है । राजस्व के दृष्टिकोण से सबसे अधिक राजस्व की प्राप्ति पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही सरकार को प्राप्त होती है लेकिन जितने प्रतिशत के हिसाब से राजस्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश देता है विकास में उतने प्रतिशत उसके भाग में नहीं आता। इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा दिया जाना जनहित में बहुत आवश्यक है जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का समूचा विकास संभव हो सके।

अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश अलग राज्य बनने के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश को एक अलग हाई कोर्ट मिल सकेगा । यह कार्यक्रम जन जागरण हेतु और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है जो आगे भी जारी रहेगा।

यात्रा एवं ज्ञापन कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अधिवक्ता श्याम सुंदर दुर्ग, विजय सिंह, हितेश कुमार, आदि सम्मिलित रहे।

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