वाराणसी, 24 अगस्त । उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में इस बार अगस्त माह में अब तक औसतन 333.10 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक है। यह बारिश धान की फसल के लिए बेहद लाभकारी मानी जा रही है। जिले में धान की खेती करने वाले किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है, क्योंकि भरपूर वर्षा के कारण फसल की बढ़वार बेहद अच्छी हो रही है।

जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि अधिक वर्षा से जहां धान की खेती को संजीवनी मिली है, वहीं किसानों को अब अतिरिक्त सावधानी बरतने की भी आवश्यकता है। उन्होंने चेताया कि अधिक वर्षा और नमी के कारण फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है।

—यूरिया का प्रयोग अब न करें — कृषि अधिकारी की चेतावनी

कृषि अधिकारी ने विशेष रूप से उन किसानों को सलाह दी है, जिन्होंने यूरिया का टॉप ड्रेसिंग के रूप में दो बार प्रयोग कर लिया है, वे अब किसी भी स्थिति में यूरिया का दोबारा प्रयोग न करें। अधिक यूरिया से फसल की वानस्पतिक वृद्धि तो होती है, लेकिन तना और पत्तियां मुलायम हो जाती हैं, जिससे फसल में कीट और रोग तेजी से फैल सकते हैं।

—सब्जी की खेती करने वाले किसान रहें सतर्क

फूलगोभी, बैंगन, मिर्च, टमाटर और कद्दू वर्गीय फसलों जैसे — खीरा, लौकी, नेनुआ, करेला आदि की खेती करने वाले किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में जल निकासी की तत्काल व्यवस्था करना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन किसानों ने अभी हाल में इन सब्जियों की नर्सरी तैयार की है, उन्हें तना सड़न (डैम्पिंग ऑफ) जैसी बीमारियों का खतरा अधिक है। इससे बचाव के लिए फफूंदनाशी दवाओं का छिड़काव करना आवश्यक है।

—उर्वरक की उपलब्धता पर्याप्त, लेकिन प्रयोग सीमित रखें

जिले में यूरिया सहित अन्य रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है। किसान पोस मशीन से अंगूठा लगाकर अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक खरीद सकते हैं। हालांकि कृषि अधिकारी ने यह भी चेताया कि अनावश्यक रूप से उर्वरकों का अधिक प्रयोग न केवल मिट्टी और पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे खेती की लागत भी बढ़ती है।

—बारिश ने तोड़ा चार दशक पुराना रिकॉर्ड

गौरतलब है कि पिछले तीन दिनों से वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में रुक-रुक कर भारी बारिश हो रही है। बीते 24 घंटों में शनिवार सुबह तक 161.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में इससे अधिक वर्षा सिर्फ 1987 में हुई थी, जब 165 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यानी इस वर्ष अगस्त की दूसरी सर्वाधिक वर्षा शनिवार को हुई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 25 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।

By editor

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