निरीक्षण के दौरान अपर सचिव आयुष शिक्षा विभाग एवं निदेशक ने हल्दूखाता में निर्माणाधीन अस्पताल की इमारत, बाहरी परिसर और अधोसंरचना की बारीकी से जांच की। उन्होंने अस्पताल परिसर के बाहर वर्षा जल जमा होने पर पेयजल निगम के अधिकारियों को तत्काल जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल निर्माण में उपयोग हो रही सभी सामग्रियों की सैंपलिंग कराएं, ताकि गुणवत्ता में कोई कमी न रहे।

उन्होंने कहा कि आयुष अस्पतालों के निर्माण में देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य किया जाय और सभी तकनीकी पहलुओं की नियमित जांच की जाय। उन्होंने सिंबलचौड़ स्थित 10 बेड के अस्पताल में चल रहे मरम्मत कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने पेयजल निगम को 15 दिनों के भीतर सभी कार्य पूर्ण करने के सख़्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों के संचालन में विलंब से जनता को नुकसान होता है, इसलिए समयबद्धता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी कोटद्वार शालिनी मौर्य, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी शैलेंद्र पांडेय, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम वीरेंद्र भट्ट, तहसीलदार साक्षी उपाध्याय आदि शामिल थे।

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