जयपुर। राजधानी जयपुर में सोमवार दोपहर लोहा मंडी पेट्रोल पंप के पास उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक डंपर ने बेकाबू होकर सड़क पर चल रहे वाहनों और लोगों को बेरहमी से कुचल दिया। हादसे का नज़ारा इतना भयावह था कि कुछ ही मिनटों में सड़क पर 14 लाशें बिछ गईं, दर्जनों लोग लहूलुहान होकर सड़क पर तड़पते नजर आए। चीख-पुकार और टूटे वाहनों के बीच पूरा इलाका रणभूमि में तब्दील हो गया।घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। रोड नंबर-14 पर लोहा मंडी की तरफ से आ रहा तेज रफ्तार डंपर अचानक नियंत्रण खो बैठा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डंपर ड्राइवर पहले से ही बेहद तेज गति में था और जैसे ही मोड़ पर पहुंचा, उसने सामने से आ रही गाड़ियों को टक्कर मारनी शुरू कर दी। डंपर 300 मीटर तक वाहनों को रौंदता चला गया — कारें, बाइक, स्कूटी, सब उसकी चपेट में आ गए। कई लोग अपनी गाड़ियों समेत उछलकर दूर जा गिरे। सड़क पर एक ही पल में चीखों और टूटे कांच की आवाज़ गूंज उठी।पुलिस सूत्रों के अनुसार, डंपर चालक कल्याण मीणा, जो विराटनगर का रहने वाला है, हादसे के वक्त नशे में था। कुछ देर पहले ही उसकी एक कार चालक से कहासुनी हुई थी। गुस्से में आकर उसने वाहन और तेज भगाना शुरू किया और कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका मातम में बदल गया।
आरोपी चालक घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है और पुलिस की निगरानी में है।हादसे में घायल लोगों को तुरंत एसएमएस ट्रॉमा सेंटर, कांवटिया और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। एसएमएस अस्पताल में वर्षा कुमारी, दानिश, अजय, मनोज, देशराज, कमल और ज्ञान रंजन सहित सात लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल में लाए गए शवों को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। कई शव क्षत-विक्षत हालत में थे, जिन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था। सात शवों की पहचान हो चुकी है, बाकी की प्रक्रिया जारी है।मृतकों में गिरजा बाई (55), सुरेश मीणा (35), महेश मीणा (35), विनोद मालपानी (44), भीखी बाई (50), महेंद्र बुनकर (38) और 7 वर्षीय बच्ची भावना वर्मा उर्फ भानु शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर है।घटना के बाद जयपुर पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। प्राथमिक जांच में पाया गया कि डंपर कई किलोमीटर तक गलत दिशा में दौड़ता रहा, लेकिन ट्रैफिक पुलिस ने रोकने की कोशिश नहीं की। लापरवाही को गंभीर मानते हुए डीसीपी ट्रैफिक सुमित मेहरड़ा ने तत्काल प्रभाव से ट्रैफिक सीआई राजकिरण, एएसआई राजपाल सिंह और कॉन्स्टेबल महेश कुमार को निलंबित कर दिया है।हादसे के बाद एसएमएस अस्पताल में दर्द और चीखों का सन्नाटा पसरा रहा। एक साथ 10 शवों के आने से डॉक्टरों और स्टाफ पर भी दबाव बढ़ गया। परिजन बेसुध होकर रोते-बिलखते अस्पताल के बाहर बैठे रहे। एक महिला बेहोश होकर गिर पड़ी जब उसे बताया गया कि उसके पति और बेटे दोनों की मौत हो गई है।फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत एकत्र किए हैं।
पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया है।जयपुर के इस दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। लोगों में आक्रोश है कि आखिर ट्रैफिक पुलिस होते हुए भी डंपर को इतनी देर तक किसी ने क्यों नहीं रोका। सोशल मीडिया पर भी लोग जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शहर में मातम का माहौल है, और हर किसी के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है— “क्या हमारी सड़कें अब मौत के इंतज़ार में हैं?”
