पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा प्रहार करते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की। बनर्जी ने यह चुनौती निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के दौरान कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित एक धरने के दौरान दी।
पाखंड का लगाया आरोप
निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हटाए जाने के खिलाफ धरने पर एक सभा को संबोधित करते हुए, बनर्जी ने शाह के स्वच्छ और बेदाग शासन के आह्वान को पाखंड बताया और सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले के संबंध में उनकी गिरफ्तारी का उल्लेख किया। वर्ष 2010 में, गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री शाह को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था और मामले के सिलसिले में साबरमती केंद्रीय जेल में रखा गया था।
जमानत मिलने से पहले उन्होंने दो महीने से अधिक समय जेल में बिताया और बाद में उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। शाह ने कहा था कि आरोप केंद्र में तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा गढ़े गए थे और राजनीति से प्रेरित थे। बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य प्रशासन को स्थानांतरण और अन्य राज्यों के पुलिस कर्मियों की तैनाती की धमकी दी।
राजनीतिक निहितार्थ
यह हमला ऐसे समय में आया है जब बंगाल में चुनावी सरगर्मी और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच तनाव चरम पर है। टीएमसी इस मुद्दे को ‘बंगाली अस्मिता’ और ‘लोकतांत्रिक अधिकारों’ से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रही है।
