बुधवार को आयोजित सेमिनार में उन्होंने धर्म और रिलीजन में अन्तर स्पष्ट करते हुए उसकी बारीकियों को उजागर किया। उन्होंने अपनी संस्था आनन्द मार्ग प्रचारक संघ की क्रियाविधि एवं समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता में कैसे कार्य करते हैं, इस पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य कुछ पाना नहीं बल्कि हमारे माध्यम से हमारे 150 से अधिक देशों में जो केंद्र हैं और उनसे सम्बंधित लाखों लोगों के जीवन में हम कुछ परिवर्तन ला सकें, यह लक्ष्य है।

कार्यक्रम की शुरुआत में छात्रावास संरक्षक प्रो० राजेश कुमार गर्ग ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया एवं भारतीय ज्ञान परम्परा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कालिदास के श्लोक के माध्यम से भारतीय मनीषियों, संतों एवं दार्शनिकों की वृहद परम्परा पर चर्चा की। छात्रावास के अधीक्षक डॉ० शैलेन्द्र कुमार सिंह ने आचार्य दिव्य चेतनानंद अवधूत महाराज का परिचय कराते हुए उनकी विशिष्ट एवं वृहद कार्य को सराहा। साथ ही उन्होंने मानव को मानव बने रहने एवं संवेदनशीलता बनाए रखने की प्रेरणा दी। अंत में उन्होंने अशिक्षा, भुखमरी को समाप्त करने के लिए एवं मानवता को बनाए रखने के लिए अन्तेवासियों से आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन अनुभव कुमार दूबे ने एवं कार्यक्रम व्यवस्था छात्रावास कार्यालय प्रमुख आशीष सिंह ’गुडान’ ने किया। कार्यक्रम में छात्रावास के समस्त अन्तेवासी मौजूद रहे। इस तकनीकी सत्र से मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से सभी लाभान्वित हुए।

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