सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) किसी उत्सव से कम नहीं है. इस समय हर किसी की नजरें आयोग के चेयरमैन की ओर टिकी हैं. इसी बीच, पोस्टल एम्प्लॉई बॉडी (डाक कर्मचारी संगठन) ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए एक बड़ा प्रस्ताव रखा है, जो अगर मान लिया गया तो लाखों कर्मचारियों की जेब में सीधा असर डालेगा.
बता दें कि पोस्टल एम्प्लॉई बॉडी ने 8वें वेतन आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखकर यह मांग की है कि वर्तमान महंगाई भत्ते (DA) का 50% हिस्सा बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाए.
क्यों हो रही है मर्जर की मांग?
अक्सर जब महंगाई एक निश्चित स्तर जैसे 50% को पार कर जाती है, तो वेतन आयोगों के इतिहास में उसे मूल वेतन में मर्ज करने की मांग उठती है. इसके पीछे का गणित सरल है. DA सिर्फ महंगाई को कवर करने के लिए होता है, जबकि बेसिक पे वो आधार है जिस पर अन्य सभी भत्ते जैसे कि HRA, TA, पेंशन आदि कैलकुलेट होते हैं. ऐसे में अगर 50% DA बेसिक पे में मर्ज हो जाता है, तो भविष्य में HRA और अन्य भत्तों की गणना नए, बढ़े हुए बेसिक पे पर होगी. इससे कुल वेतन में एक बड़ा जंप देखने को मिलता है.
क्या यह सब तय हो चुका है?
यहां हमें थोड़ा व्यावहारिक होने की जरूरत है. पोस्टल बॉडी ने अपनी बात रखी है, लेकिन अंतिम निर्णय सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों पर ही निर्भर करेगा. 8वें वेतन आयोग का गठन और उसकी रिपोर्ट आने की प्रक्रिया लंबी होती है. सरकार कई पहलुओं जैसे राजकोषीय घाटा को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेती है.
यह मांग कर्मचारियों के हक में तो है, लेकिन क्या सरकार इसे मानेगी, यह देखना दिलचस्प होगा. फिलहाल, यह एक प्रस्ताव है जिसे आयोग गंभीरता से ले सकता है. लाखों कर्मचारी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 8वां वेतन आयोग न केवल वेतन बढ़ाएगा, बल्कि महंगाई को देखते हुए वेतन ढांचे को और भी अधिक पारदर्शी बनाएगा.
