आम तौर पर लोग मानते हैं कि इनकम टैक्स विभाग सिर्फ आपकी कमाई पर नजर रखता है, लेकिन असलियत इससे कहीं आगे है। दिल्ली के रहने वाले कुमार को यह तब समझ आया, जब उन्होंने अपने बैंक खाते में 8 लाख रुपये जमा किए और कुछ ही दिनों में उन्हें इनकम टैक्स नोटिस मिल गया।

विभाग ने इस रकम को सीधे उनके बिजनेस इनकम से जोड़ते हुए धारा 44AD के तहत टैक्स डिमांड भेज दी। कुमार ने पहले आयकर आयुक्त के पास अपील की, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। हार मानने के बजाय उन्होंने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) का दरवाजा खटखटाया — और लंबी कानूनी जंग के बाद आखिरकार 22 सितंबर 2025 को जीत उनके नाम हुई।

विभाग की कार्रवाई और विवाद की जड़
वर्ष 2019 में शुरू हुए इस केस में आयकर विभाग ने धारा 143(2) के तहत नोटिस जारी किया था, जो केवल बैंक खाते में नकद जमा की जांच तक सीमित होना चाहिए था। लेकिन आकलन अधिकारी ने सीमा से बाहर जाकर पूरी जमा राशि को कुमार की व्यावसायिक आय मान लिया और उस पर टैक्स डिमांड लगा दी। कुमार का तर्क था कि अधिकारी को केवल राशि के स्रोत की जांच का अधिकार था, न कि उस पर कर निर्धारण करने का। ऐसा करने से पहले उन्हें उच्च अधिकारी (CIT) की अनुमति लेनी चाहिए थी, जो उन्होंने नहीं ली। कुमार ने इस प्रक्रिया को नियमविरुद्ध बताते हुए मामला अदालत में ले गए।

ITAT ने क्या कहा-
दिल्ली की अपीलीय न्यायाधिकरण ने सुनवाई के बाद साफ कहा कि आकलन अधिकारी और अपीलीय आयुक्त, दोनों ने ही अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया। उन्होंने अपने निर्णय में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि सीमित जांच वाले मामलों में अधिकारी अपनी सीमा का उल्लंघन नहीं कर सकते। ट्रिब्यूनल ने पाया कि विभाग के पास न तो कोई ठोस सबूत था और न ही यह स्पष्ट किया गया कि जांच की सीमा क्यों बढ़ाई गई। नतीजतन, ITAT ने पूरी कार्रवाई को अवैध और निरस्त कर दिया।

क्या अब कुमार को टैक्स देना होगा?
नहीं। ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद कुमार पर किसी भी तरह की टैक्स देनदारी नहीं बनती। ITAT ने साफ कहा कि विभाग की जांच और टैक्स डिमांड दोनों ही नियमों के विरुद्ध थीं। यानी अब न तो कुमार को कोई अतिरिक्त टैक्स देना है और न ही किसी सजा का सामना करना होगा।
 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights