देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्पष्ट किया है कि भारत में लगभग 72 करोड़ बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) ऐसे हैं, जिनमें न्यूनतम बैलेंस रखने की कोई बाध्यता नहीं है और न ही इनमें बैलेंस कम होने पर कोई जुर्माना वसूला जाता है।
जीरो बैलेंस पर नहीं लगेगा जुर्माना
इन खातों में प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खुले खाते भी शामिल हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, छोटे जमाकर्ताओं और उन लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना है जो अब तक इन सुविधाओं से दूर थे। इन खातों को ‘जीरो बैलेंस’ खाते के तौर पर चलाया जा सकता है, जहाँ जमा, निकासी और एटीएम जैसी बुनियादी सुविधाएँ बिना किसी अतिरिक्त बोझ के मिलती हैं।
बैंकों की कमाई और जुर्माने का पूरा गणित
जहाँ एक तरफ जीरो बैलेंस खातों पर राहत है, वहीं सामान्य बचत और चालू खातों (Current Accounts) के नियम अलग हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि सामान्य खातों में बैंकों के बोर्ड और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक निश्चित मासिक औसत बैलेंस बनाए रखना जरूरी होता है। यदि कोई ग्राहक ऐसा नहीं कर पाता, तो बैंक उस पर उचित और पारदर्शी शुल्क लगा सकते हैं। आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से करीब 8,092.83 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना वसूले हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह बड़ी दिखने वाली राशि बैंकों की कुल कमाई का महज 0.3 प्रतिशत ही है और इसका मकसद मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि सेवाओं के खर्च को संतुलित करना है।
वित्तीय समावेशन की दिशा में बढ़ते कदम और बैंकों की पहल
बैंकिंग सेवाओं को अधिक जन-हितैषी बनाने के लिए कई सरकारी बैंकों ने अपने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इसकी शुरुआत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने मार्च 2020 में ही कर दी थी, जब उसने बचत खातों पर मिनिमम बैलेंस का जुर्माना पूरी तरह खत्म कर दिया था। इसी राह पर चलते हुए साल 2025 तक 9 अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी इस तरह के जुर्माने हटा दिए हैं, जबकि कुछ अन्य बैंकों ने इन शुल्कों में काफी कटौती की है। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से बैंकिंग प्रणाली ग्राहकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनेगी। इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी आय अनियमित है या जो छोटी-छोटी बचत करके अपने भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं, जिससे अंततः देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूती मिलेगी।
