आज के दौर में शादियां केवल आपसी तालमेल से नहीं बल्कि बदलती जीवनशैली और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ रही हैं। भोपाल के परिवार न्यायालय (Family Court) से सामने आए हालिया मामले चौंकाने वाले हैं। यहां देखा जा रहा है कि आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के बाद कई महिलाएं छोटे-छोटे पारिवारिक हस्तक्षेप को भी स्वीकार नहीं कर पा रही हैं जिससे रिश्तों में दरार आ रही है।

हकीकत बयां करते तीन गंभीर मामले

परिवार परामर्श केंद्रों में आने वाले मामलों से पता चलता है कि कैसे सफलता के बाद रिश्तों की प्राथमिकताएं बदल गईं:

केस 1: पढ़ाई के बाद बदल गए तेवर भोपाल के एक पति ने अपनी आठवीं पास पत्नी को कड़ी मेहनत से पढ़ाया और M.Sc. कराई। पत्नी की जैसे ही नौकरी लगी उसने ससुराल वालों के साथ विवाद शुरू कर दिया। पति अब अपना घर बचाने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहा है।

केस 2: 15 दिन में ही मोहभंग एक अन्य मामले में पत्नी NHM (स्वास्थ्य विभाग) में कार्यरत है और पति बैंक कर्मचारी। शादी के मात्र 15 दिनों के भीतर ही दोनों के बीच साथ न रहने को लेकर ऐसा विवाद हुआ कि मामला अब तलाक की दहलीज पर है।

केस 3: पंडिताई से सब-इंस्पेक्टर तक का सफर और अलगाव यह सबसे चर्चित मामला है। एक पति ने पंडिताई करके अपनी पत्नी को पुलिस की तैयारी कराई। पत्नी SI (सब-इंस्पेक्टर) बन गई। जो पत्नी पहले पति के पेशे से खुश थी वर्दी मिलने के बाद उसे पति का पहनावा और चोटी (शिखा) अखरने लगी। अब दोनों के बीच गहरा विवाद है।

क्यों दरक रहे हैं रिश्तों के आधार?

काउंसलर शैल अवस्थी के अनुसार आधुनिक दौर में व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि हो गई है। विवादों के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

सवाल-जवाब पसंद नहीं: नई पीढ़ी को पहनावे, घूमने-फिरने या सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर ससुराल पक्ष की टोक-टाक पसंद नहीं आ रही है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता: शिक्षा और नौकरी के बाद महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं जिससे वे अब किसी भी प्रकार का समझौता (Compromise) करने के बजाय अलग होना बेहतर समझती हैं।

अनुबंध बना विवाह: लोग अब विवाह को एक पवित्र बंधन मानने के बजाय एक कॉन्ट्रैक्ट की तरह देख रहे हैं। उम्मीदें पूरी न होने पर इसे तोड़ना आसान माना जाने लगा है।

संवादहीनता और सोशल मीडिया: तकनीक के प्रभाव और बातचीत की कमी के कारण छोटी-छोटी गलतफहमियां बड़े कानूनी विवादों में बदल रही हैं।

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