दुबई ने बीते  48 घंटों में एक बड़ी सैन्य चुनौती का सामना किया है। इस दौरान ईरान द्वारा दुबई पर किए मिसाइल अटैक और ड्रोन हमलों ने इस वैश्विक शहर की सुरक्षा व्यवस्था की अग्निपरीक्षा ली। हालांकि, यूएई के अत्याधुनिक रक्षा तंत्र ने एक बड़ी तबाही को टालने में सफलता हासिल की है, लेकिन इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में चिंता की लहर पैदा कर दी है।

हमलों का खौफनाक ब्योरा और हताहतों की संख्या

खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में अब तक 3 प्रवासियों की मौत की पुष्टि हुई है, जो पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के नागरिक थे। इसके अतिरिक्त, विभिन्न देशों के लगभग 58 लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं, जिनमें भारतीय, एमिराती, मिस्री और फिलीपीनो सहित कई अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं।

 

दूसरे दिन आसमान में छिड़ी जंग

हमलों के दूसरे दिन यूएई के सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व मुस्तैदी दिखाई। आसमान से बरसती मौत को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम ने पूरी ताकत झोंक दी:

  • मिसाइलें: 20 बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि 8 मिसाइलें समुद्र में जा गिरीं।
  • क्रूज मिसाइल: 2 क्रूज मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले ही मार गिराया गया।
  • ड्रोन: 311 ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया गया, हालांकि 21 ड्रोन रिहायशी इलाकों में गिरने में सफल रहे, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुँचा है

ऐसे  रहे दुबई के बीते दिन

तीन दिनों के भीतर ईरान ने कुल 165 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से 152 को रक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया। इसके अलावा 541 ड्रोनों के बड़े जत्थे में से 506 को सफलतापूर्वक रोक लिया गया। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार अधिकांश नुकसान इंटरसेप्ट किए गए मलबे के कारण हुआ है।

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कैसे बची दुबई की ढाल?

दुबई की सुरक्षा के पीछे उसका मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम है, जिसे दुनिया के सबसे उन्नत तंत्रों में गिना जाता है।

1.      THAAD: यह अत्यधिक ऊंचाई पर आने वाली मिसाइलों को खत्म करता है।

2.      Patriot PAC-3: यह मध्यम और निचली ऊंचाई पर सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

3.      Pantsir-S1: यह अंतिम रक्षा पंक्ति के रूप में ड्रोनों और कम ऊंचाई वाले खतरों का सफाया करता है।

इसी त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे ने दुबई को एक बड़े मलबे के ढेर में तब्दील होने से बचा लिया। वर्तमान में, यूएई की वायु सेना और रक्षा मंत्रालय हाई अलर्ट पर हैं और नागरिकों को केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।

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