ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को लेकर एक ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। करीब 48 सालों के लंबे इंतजार के बाद, महाप्रभु के अमूल्य खजाने की गणना और उसकी वास्तविक स्थिति जानने का रास्ता साफ हो गया है।

2 मार्च की बैठक में तय होगा शुभ मुहूर्त
रत्न भंडार की गणना की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए 2 मार्च 2026 को मंदिर प्रबंधन समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में ज्योतिषीय गणना और मंदिर की परंपराओं के अनुसार वह शुभ मुहूर्त तय किया जाएगा, जब आभूषणों की गिनती शुरू होगी। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत 14 पन्नों के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को लागू करने की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

1978 के बाद पहली बार पूर्ण गणना
रत्न भंडार की आखिरी आधिकारिक गणना 1978 में हुई थी। हालांकि 2024 में भंडार को मरम्मत के लिए खोला गया था, लेकिन आभूषणों की विस्तृत सूची और क्रॉस-वेरिफिकेशन का काम अब 2026 में होने जा रहा है। गणना पहले बाहरी भंडार की होगी और उसके बाद आंतरिक भंडार के रहस्यों और खजाने की जांच की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी और खजाने का एक Digital Catalogue तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य के लिए पारदर्शिता बनी रहे।

सुरक्षा और विशेषज्ञ टीम
गणना के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। रत्न विशेषज्ञ इस टीम का हिस्सा होंगे। गणना में शामिल होने वाले सभी सदस्यों को गोपनीयता की शपथ लेनी होगी। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खजाने की गिनती के दौरान भक्तों के दर्शन और मंदिर की दैनिक रस्मों में कोई बाधा नहीं आएगी।

खजाने में क्या है ?
1978 के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, इस भंडार में 128 किलो से अधिक सोना और 221 किलो चांदी के आभूषणों के साथ-साथ बेशकीमती हीरे, माणिक और नीलम मौजूद हैं, जो सदियों से राजाओं और भक्तों द्वारा महाप्रभु को अर्पित किए गए हैं

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