डॉक्टर, किडनैपर और फिर हत्यारा…ये तीन शब्द गैंगस्टर संजीव जीवा की कहानी बताने के लिए काफी हैं। उसी गैंगस्टर संजीव जीवा की, जिसकी लखनऊ कोर्ट में बुधवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। हालांकि, उसकी हत्या क्यों की गई, ये अभी तक सवाल बना हुआ है। अभी यह भी सवाल बना हुआ है कि संजीव की डेड बॉडी कहां जाएगी…मुजफ्फरनगर या फिर शामली?

संजीव के नाम का रुतबा ये है कि उसकी मौत की खबर फैलते ही पश्चिमी यूपी के 20 जिलों में हलचल होने लगी। ये वही जिले हैं, जहां पर संजीव के नाम की दहशत थी। यहां बस उसके नाम पर काम हो जाया करता था। पुलिस के अनुसार, संजीव ने जरायम की दुनिया में कदम रखने के बाद 40 लड़कों का अपना एक गैंग खड़ा किया। इसके कई मेंबर अभी जेल में हैं। संजीव ने मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली में तकरीबन 100 करोड़ की संपत्ति बनाई। इनमें रियल स्टेट, कई जूतों और कपड़ों के शोरूम शामिल हैं।

संजीव ने अपराधों को छिपाने के लिए सियासी पकड़ बनानी चाही। लेकिन छवि खराब होने के कारण कोई भी पार्टी उस पर दांव नहीं लगाना चाह रही थी। ऐसे में उसने अपनी पत्नी पायल महेश्वरी का सहारा लिया। 2017 के विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर की सदर सीट से संजीव ने अपनी पत्नी को रालोद से टिकट दिलवाया। लेकिन वह चुनाव हार गईं। फिर भी वह क्षेत्र में एक्टिव रहीं।

इस हत्या के बाद से शामली और मुजफ्फरनगर में बने संजीव जीवा के घरों में लोगों की भीड़ जमा होने लगी है। यूपी के इन्हीं 2 जिलों में उसने अपना बचपन और जवानी के दिन बिताए हैं। फिर यहीं से वह अपराध की दुनिया में आगे बढ़ा।

संजीव के शामली वाले गांव में ग्रामीण उसकी हत्या की खबर सुनकर हैरान हैं। जिस घर में वो 20 साल पहले रहता था, वहां पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। लोग आपस में संजीव के बारे में बात कर रहे हैं। जहां संजीव रहता था, उस घर पर ताला लगा हुआ है। उसके गांव के लोग यही बोल रहे हैं कि संजीव जीवा ने ऐसा क्या किया, जो उसको मार दिया गया। उसने जो किया था, जो आरोप लगे थे। उसकी सजा तो उसे मिल ही चुकी है।

वहीं, संजीव जीवा के मुजफ्फरनगर वाले घर पर उसके जानने वालों का जमावड़ा लगा हुआ है। उसके घर पर उसकी सौतेली बहन और कुछ रिश्तेदार बैठे मिले। सौतेली बहन इस मामले में कुछ भी बोलने से बचती दिखाई दी। उसका कहना है, हम तो काफी समय से उससे नहीं मिले हैं। मिले होते, तो पता होता कि वह अपराधी है। हम तो बस बचपन तक ही साथ रहे। साथ खेले और फिर शादी के बाद अलग हो गए। इसके बाद उसने क्या किया, क्यों जेल गया? आरोप कितने सही हैं? हम कुछ भी नहीं जानते।

अब आपको लेकर चलते हैं उस गांव में, जहां संजीव जीवा का बचपन बीता। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर संजीव का आदमपुर गांव है। यहां पर जीवा 20 साल तक रहा। यहीं से उसने 12वीं तक की पढ़ाई की। आज उसके पुश्तैनी घर पर ताला लगा हुआ है। गांव वालों की मानें तो संजीव जीवा के परिवार ने करीब 30 साल पहले गांव छोड़ दिया था। उसके पिता के पास से 40 बीघा जमीन थी। उसी पर खेती बाड़ी करके परिवार का खर्च चलता था। संजीव जीवा एक संपन्न और साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाला व्यक्ति था। संजीव जीवा के परिवार में दो भाई तीन बहनें थी। उसकी मां गृहिणी थी।

ग्रामीणों ने बताया कि संजीव के परिवार से किसी से कोई विवाद गांव में कभी नहीं हुआ। उसके परिवार के लोग सब से मिलजुल कर रहते थे। गांव के लोग बताते हैं कि कि वह परिवार बड़ा सज्जन परिवार था, कभी किसी से कोई वाद-विवाद नहीं था। संजीव गांव से शामली आकर प्रतिदिन होम्योपैथिक की डॉक्टरी की शिक्षा ले रहा था।

इसके बाद उसने कंपाउंडर का काम शुरू कर दिया। इसलिए वह गांव के लोगों की हल्की बीमारियों में दवा भी दे देता था। वह गांव की लोगों में हर तरीके मदद करता था। गांव छोड़ने के बाद मुजफ्फरनगर से सोनिया विहार दिल्ली में जीवा का परिवार रहने लगा। जीवा की शादी भी वहीं दिल्ली में हुई थी। जीवा की हत्या के बाद गांव वालों में उसके परिवार और उसकी मौत पर हमदर्दी है। ग्रामीणों ने बताया कि जीवा को पहले सभी डॉक्टर-डॉक्टर कहकर ही बुलाते थे।

संजीव जीवा और उसका परिवार करीब 30 साल पहले 206/03, प्रेमपुरी थाना कोतवाली नगर में आकर बस गया था। लेकिन यहां से परिवार के लोग डेढ़ दशक पूर्व मकान बेचकर चले गए थे। उसके बाद परिवार के कुछ लोग यहीं पर किराए का मकान लेकर रह रहे थे। संजीव जीवा भी शादी के बाद यहीं रहता था। यहीं से वह आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था। यहीं पर उसने अपराध से कमाई हुई दौलत से करोड़ों की संपत्ति बनाई।

संजीव माहेश्‍वरी उर्फ जीवा राजनीति की दुनिया में पत्‍नी पायल माहेश्‍वरी को स्‍थापित कराना चाहता था। ऐसा कर उसका इरादा अपराध की दुनिया से निकलकर अपने आपको को सफेदपोश राजनेता के रूप में स्‍थापित करने का था। साल 2017 में उसने अपनी पत्नी पायल को राष्ट्रीय लोकदल से मुजफ्फरनगर सीट पर चुनाव लड़ा दिया। हालांकि, पायल जीत हासिल नहीं कर सकीं और पांचवें नंबर पर रही।

उसके बाद से संजीव जीवा पर कानून का शिकंजा कसता चला गया। अधिकतर आपराधिक मामलों में बरी होने के बावजूद गैंगस्‍टर के तीन मुकदमों में जीवा के खिलाफ सुनवाई चल रही थी। विशेष गैंगस्‍टर कोर्ट के जज अशोक कुमार ने जीवा को 9 और 13 जून को अलग-अलग मामलों में तलब किया हुआ था। यहीं वजह रही कि जिला प्रशासन ने एक साल पहले संजीव जीवा के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट 14 (1) की कार्रवाई करते हुए महावीर चौक स्थित करोड़ों रुपए की कीमत के उसके तीन मंजिला शोरूम को सीज कर दिया था।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights