उद्घाटन समारोह में मुख्यातिथि के रूप में आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव ने दीप प्रज्वलित कर चैम्पियनशिप का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “प्रथम पैरा योगासन चैम्पियनशिप का उद्घाटन करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि दिव्यांगजन को प्रोत्साहित करने का एक महत्त्वपूर्ण मंच है। इस आयोजन से समाज में जागरूकता बढ़ेगी। योग किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं, यह सभी के लिए है। भविष्य में हम विश्व पैरा योगासन चैम्पियनशिप भी आयोजित करेंगे।”

इस अवसर पर मंच पर योगासन भारत एवं वर्ल्ड योगासन के महासचिव डॉ. जयदीप आर्य (अध्यक्षता), प्रो. मुरली मनोहर पाठक, कुलपति, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, राजेश अग्रवाल, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, सुधांशु मित्तल, अध्यक्ष, भारतीय खो-खो महासंघ, उदित शेट, अध्यक्ष, योगासन भारत तथा वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

पहले दिन की मुख्य झलकियां

“दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए योगासन खेल की आवश्यकता” विषय पर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें योग के माध्यम से आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता स्थापित करने पर प्रकाश डाला गया।

एमडीएनआईवाई अधिकारियों द्वारा संकेत भाषा संवेदनशीलता कार्यशाला आयोजित की गई, ताकि प्रतिभागियों व दर्शकों को मूक-बधिर बच्चों की भावनाओं को समझने में मदद मिल सके।

दिव्यांग सेवा संस्थान के बच्चों द्वारा एक भावनात्मक चित्रकला प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें उनकी अदम्य प्रतिभा और जज़्बे को दर्शाया गया।

प्रतियोगिता में कुल 200 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 20 दृष्टिबाधित महिला खिलाड़ी, 38 दृष्टिबाधित पुरुष खिलाड़ी, 43 बधिर पुरुष खिलाड़ी और 100 से अधिक शारीरिक रूप से दिव्यांग (OH) खिलाड़ी शामिल हैं।

इस अवसर पर डॉ. जयदीप आर्य, महासचिव, योगासन भारत एवं वर्ल्ड योगासन ने कहा, “एमडीएनआईवाई, जो योग का आध्यात्मिक घर है, में प्रथम पैरा नेशनल योगासन चैम्पियनशिप का उद्घाटन हमारे लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन योगासन खेलों के इतिहास में नए युग का आरंभ है। आज हम केवल एक खेल प्रतियोगिता का नहीं, बल्कि मानवता और समावेशिता की सशक्त अभिव्यक्ति का उत्सव मना रहे हैं।”

प्रधानमंत्री सेवा पखवाड़ा को समर्पित यह चैम्पियनशिप दिव्यांगजन के अदम्य साहस का सम्मान करते हुए समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

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