अब जल्द ही साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जो भारत के कुछ इलाकों में दिखाई। इतना सूतक काल भी मान्य है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान जब सूतक काल लग जाता है तो उस समय कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। ग्रहण में सूतक के नियमों का विशेष पालन करने का विधान है।
मंदिर के भी सभी कपाट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में 4 मंदिर ऐसे हैं, जहां ग्रहण के दौरान भी मंदिर खुले रहते हैं और वहां विधिवत रूप से पूजा-पाठ की जाती है। आइए इस लेख में विस्तार से उन धार्मिक स्थलों के बारे में जानते हैं।
महाकाल मंदिर, उज्जैन
उज्जैन में स्थित महाकाल मंदिर में भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। क्या आप जानते हैं कि यह मंदिर ग्रहण काल में भी खुली रहती है और यहां भक्तों को पूजा-पाठ करने की कोई भी मनाही नहीं है। बस जब महाकाल जी की आरती होती है तो इस दौरान समय बदल दिया जाता है।
लक्ष्मीनाथ मंदिर, बीकानेर
बीकानेर में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर ग्रहण में भी खुली रहती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जब एक बार सूतक लगने के बाद मंदिर के कपाट कर दिए गए और भगवान को भोग भी न लगाया गया था। तब इस समय भगवान लक्ष्मीनाथ ने बालक का रूप धारण कर लिया था और रात्रि में मंदिर के सामने हलवाई की दुकान पर दुकानदार से बच्चे ने कहा मुझे भूख लगी है। हलवाई ने उस बच्चे को मिठाई दी। अगले दिन उस मंदिर से बच्चे का पदचिह्न गायब था। तब हलवाई ने पुजारी को पूरी बात बताई। तब से मंदिर के कपाट बंद नहीं होते हैं और भगवान को नियमित रूप से भोग लगाई जाती है।
विष्णुपद मंदिर, गया
यह मंदिर गया बिहार में स्थित है। यह स्थान पिंडदान और पितरों का श्राद्ध करने के लिए सबसे उत्तम स्थान बताया गया है। यहां विष्णुपद मंदिर में सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान भी मंदिर के कपाट खुले रहते हैं और विधिवत रूप से पूजा की जाती है।
तिरुवरप्पु कृष्ण मंदिर, केरल
भगवान श्रीकृष्ण का यह मंदिर कोट्टायम जिले में स्थित है। इस मंदिर में ग्रहण के दौरान भी विधिवत रूप से भगवान की पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब मंदिर ग्रहण के दौरान बंद कर दिए गए थे, तब अगले दिन सुबह भगवान की प्रतिमा पतली हो गई थी। तब से भगवान की पूजा और उन्हें भोग ग्रहण के दौरान भी लगाई जाती है।
