राजधानी दिल्ली में एक खतरनाक सेक्सटॉर्शन रैकेट का पर्दाफाश हुआ है जहां सुंदर लड़कियां बड़े-बड़े कारोबारियों को अपने प्रेम और हुस्न के जाल में फंसाकर लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ रही हैं। यह कोई आम प्रेम कहानी नहीं बल्कि एक सुनियोजित अपराध है जिसमें दो वकील और कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह रैकेट दिल्ली में खुलेआम चल रहा है जिसने कई प्रतिष्ठित लोगों को बर्बाद कर दिया है।

कैसे चलता है यह ‘हुस्न का खेल’?

इस गिरोह का तरीका बेहद शातिर है। सबसे पहले एक आकर्षक लड़की बड़े कारोबारियों को अपनी प्यारी सी मुस्कान और बातचीत से प्रभावित करती है। नंबर एक्सचेंज होते हैं बातें होती हैं और फिर प्यार का नाटक रचकर उन्हें होटल तक ले जाया जाता है जहां शारीरिक संबंध बनते हैं।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब दो वकीलों की एंट्री होती है। ये वकील कथित तौर पर स्थानीय पुलिसकर्मियों के सहयोग से पीड़ित कारोबारी पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाकर उसे फंसा देते हैं। पीड़ित को जेल जाने का डर दिखाया जाता है जिससे वह घबराकर अपने परिजनों को थाने बुलाता है। यहीं से शुरू होता है लाखों रुपये की वसूली का खेल। दोनों वकील पूरे मामले को सेट करते हैं जिसके बाद पीड़ित को भारी भरकम रकम चुकानी पड़ती है और वह लुटा-पिटा घर लौट आता है।

चौंकाने वाला एक और मामला

कुछ दिन पहले चौहान बांगर निवासी एक 29 साल के कारोबारी ने भी ऐसी ही ठगी का दावा किया। उन्होंने बताया कि एक दंपती उनकी फर्नीचर शॉप पर कई बार आया और उनका फोन नंबर ले गया। कुछ दिनों बाद एक अनजान लड़की का उनके मोबाइल पर मैसेज आया जिसने अपना नाम बताते हुए ब्यूटी पार्लर चलाने का दावा किया। लड़की ने दोस्ती का ऑफर दिया और रोज़ाना मैसेज करने लगी जो इस गिरोह के तौर-तरीकों से मेल खाता है।

वकीलों के साथ पुलिस भी संदेह के घेरे में

पुलिस ने बताया कि पीड़ितों ने शाहदरा ज़िले के आला अफसरों से रेप के नाम पर जबरन वसूली की शिकायत की थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच ज़िले की पब्लिक ग्रीवांस (PG) सेल को सौंपी गई। पुलिस ने आरोपी महिला और पीड़ित के बीच हुई वॉट्सऐप चैटिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), होटल और थानों के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच में इस सेक्स्टॉर्शन गिरोह के वारदात को अंजाम देने की पुष्टि हो गई।

वहीं पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि इस गैंग में वकील और कुछ लड़कियां शामिल हैं जो कारोबारियों को जाल में फंसाकर वसूली का धंधा कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि यहां तक कि SHO (थाना प्रभारी) तक को रेप के मामले थाने में आने की जानकारी नहीं थी जिससे यह संदेह होता है कि कुछ निचले स्तर के पुलिसकर्मी खुद ही इन मामलों को निपटा रहे थे और वसूली में शामिल थे।

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