असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि आंतरिक कलह केवल बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में ही चल रही है। नागांव में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में कलह केवल बांग्लादेशी मूल के मुस्लिम बहुल सीटों पर ही चल रही है। मैं शुरू से ही कहता आया हूं कि वे असम और असमिया लोगों के साथ नहीं हैं। उन्होंने बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों को अपनी आत्मा गिरवी रख दी है।
विपक्ष पर वार करते हुए सरमा ने कहा कि असम कांग्रेस को तुष्टीकरण की राजनीति छोड़ देनी चाहिए और असम की जनता के साथ खड़ा होना चाहिए तथा तुष्टीकरण की राजनीति की निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक विशेष समुदाय के लोग हैं जिन्हें मोदी सरकार से घर, शौचालय, सड़क, सरकारी नौकरी, राशन और प्रति माह ₹1250 मिला। लेकिन इस समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया। क्योंकि इन्हें तुष्टिकरण चाहिए। उनका उद्देश्य विकास नहीं बल्कि मोदी को हटाना और अपने समुदाय का दबदबा क़ायम रखना था।
दूसरी ओर विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के एक दिन बाद निर्वाचन आयोग ने सोमवार को असम के पांच जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और उतने ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) का तबादला कर दिया और राज्य के लिए एक विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया। आयोग ने कोकराझार, माजुली, बक्सा, चिरांग और उदालगुड़ी के डीईओ को तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया है। निर्वाचन आयोग ने असम के मुख्य सचिव रवि कोटा को भेजे गए एक पत्र में कोकराझार के डीईओ पंकज चक्रवर्ती की जगह डॉ. पी उदय प्रवीण, माजुली के रतुल पाठक की जगह सृष्टि सिंह और बक्सा के धीरज सऊद की जगह किम्नेई चांगसन को नियुक्त करने का आदेश दिया है। इसी के साथ चिरांग के डीईओ गकुल चंद्र ब्रह्मा की जगह मधुसूदन नाथ और उदालगुड़ी के पुलक पाटगिरी के स्थान पर जय विकास को तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है।
