1950-60 के दशक कांग्रेस में टिकटों का बंटवारा प्रदेश कांग्रेस समितियों की सिफारिशों के जरिए किया जाता था. ये स्थानीय नेताओं की पकड़ और हाईकमान अंतिम मंजूरी के मिश्रित फॉर्मूले से होता था. हालांकि वक्त बदला और टिकटों के बटवारों का फॉर्मूला बदल गया, कई राज्यों में करारी हार के बाद अब असम में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी एक नए फॉर्मूले को लागू करने की योजना बना रही हैं. नए फॉर्मूले के मुताबिक कांग्रेस जमीनी फीडबैक के जरिए प्रत्याशी को मैदान में उतारेगी.
इन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी
राज्य में पार्टी कैंडिडेट के लिए स्क्रीनिंग कमेटी को प्रियंका गांधी हेड कर रही हैं. कांग्रेस नेताओं और स्क्रीनिंग पैनल के साथ वो मीटिंग भी करने वाली हैं. नए सिस्टम के हिसाब से प्रियंका गांधी की कमेटी के मेंबर को संभावित कैंडिडेट पर फीडबैक लेने के लिए राज्य में बहुत ज्यादा ट्रैवल करना होगा. कमेटी मेंबर MP सप्तगिरी शंकर उलाका, इमरान मसूद और सीनियर लीडर सिरिवेल्ला प्रसाद हैं. उन्हें कैंडिडेट को शॉर्टलिस्ट करने और चुनाव से पहले अंदरूनी बातचीत को आगे बढ़ाने का काम सौंपा गया है.
पायलट प्रोजेक्ट की तरह हो सकता प्लान
कांग्रेस के एक सोर्स ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि स्क्रीनिंग कमेटी के लिए वाड्रा का “नया सिस्टम” एक एक्सपेरिमेंट है और इसे दूसरे राज्यों के चुनावों में भी “पायलट प्रोजेक्ट” की तरह इस्तेमाल किए जाने की संभावना है. आम तौर पर स्क्रीनिंग कमेटी दिल्ली में स्टेट इलेक्शन कमेटी (SEC) से मिलती है और राज्य के सीनियर नेताओं को नेशनल कैपिटल बुलाया जाता है लेकिन प्रियंका गांधी ने इसमें बड़ा बदलाव किया है. उन्होंने कमेटी के तीन सदस्यों को पांच-पांच जिले दिए हैं और उन्हें लोकल नेताओं और दूसरे स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लेने के लिए इन जिलों में जाने का निर्देश दिया है.
तीन जिलों में घूम रहे हैं नेता
तीनों नेता पहले से ही तीनों जिलों में घूम रहे हैं, लोकल कैडर, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और लोकल पत्रकारों से मिल रहे हैं. बंद कमरे में मीटिंग कर रहे हैं. जब स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग होगी तो ये नतीजे शेयर किए जाएंगे. AICC के एक सीनियर नेता ने बताया कि अगर वाड्रा का एक्सपेरिमेंट कामयाब रहा और अगर सिस्टम ठीक से काम करता है तो पार्टी भविष्य के राज्य चुनावों में इसे अपनाने पर विचार कर सकती है.
बाकी हिस्सों में भी हो सकता है काम
साथ ही साथ कहा कि असम चुनावों में सीटें जीतने के मामले में हम कैसा भी करें, इस सिस्टम को आने वाले दूसरे चुनावों में भी अपनाया जा सकता है. हालांकि अभी यह काम ऊपरी असम में चल रहा है, राज्य के बाकी हिस्सों को बाद में कवर किया जाएगा. यह बंटवारा जिलों की सोशल इंजीनियरिंग के आधार पर भी किया गया है. कांग्रेस सांसद मसूद को ज्यादातर मुस्लिम आबादी वाले जिले दिए गए हैं, जबकि उलाका को कुछ ऐसे जिले दिए गए हैं जहां आदिवासी समुदायों की आबादी ज्यादा है.
प्रियंका गांधी को देंगे जमीनी स्तर की जानकारी
रिपोर्ट के मुताबिक मसूद को डिब्रूगढ़, धेमाजी, तिनसुकिया, बिश्वनाथ और उदलगुरी दिए गए हैं, जबकि उलाका को माजुली, जोरहाट, गोलाघाट, कार्बी आंगलोंग और नागांव से संभावित उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करने के लिए कहा गया है. कमेटी के तीसरे सदस्य प्रसाद को चराईदेव, शिवसागर, लखीमपुर, सोनितपुर और दरांग दिए गए हैं. इसे लेकर मसूद ने कहा कि हम लोकल कैडर और उम्मीदवार बनने की चाह रखने वालों के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग कर रहे हैं. हम जल्द ही स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन (वाड्रा) को अपनी फाइंडिंग्स सौंपेंगे. बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 95 सीटों पर चुनाव लड़कर 29 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा ने 93 सीटों पर चुनाव लड़कर 60 सीटें जीतीं थी.
