पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद लुधियाना के तहसील कार्यालयों में मचे हड़कंप ने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। माननीय अदालत के आदेशों की अनुपालना करते हुए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, लुधियाना (पूर्वी) द्वारा जारी पत्र नंबर 679 (दिनांक 12-02-26) के आधार पर एक बड़ा मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि सरकारी खजाने को चूना लगाने की नीयत से वसीकों (दस्तावेजों) के पंजीकरण में बड़े स्तर पर हेरफेर की गई है।
सरकारी खजाने पर ‘डाका’: 296 में से 159 वसीकों में खेल!
जानकारी के मुताबिक, कोर्ट के समक्ष पेश किए गए ‘एनेक्सचर R-2’ में कुल 296 केसों की सूची सौंपी गई थी। जब इन फाइलों की बारीकी से जांच की गई, तो अधिकारी भी दंग रह गए। इन 296 मामलों में से 159 वसीकों में स्टाम्प ड्यूटी की भारी कमी पाई गई है। आरोप है कि संबंधित पक्षों ने जानबूझकर और बदनीयती से तथ्यों को छुपाया ताकि सरकार को देय स्टाम्प शुल्क से बचा जा सके।
बदनीयती और धोखाधड़ी: अब नपेंगे ‘शतरंज के खिलाड़ी’
इस पूरे मामले में यह बात साफ हो गई है कि वसीके रजिस्टर्ड करवाते समय संबंधित पक्षों की मंशा पूरी तरह से ‘स्टाम्प चोरी’ और सरकार के साथ धोखाधड़ी करने की थी। यह कोई मामूली चूक नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत राजस्व को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद अब प्रशासन ने उन तमाम लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है जिन्होंने फर्जीवाड़े के जरिए अपनी जेबें भरने और सरकार को चूना लगाने की कोशिश की है।
