हरियाणा कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के बाद उठी सियासी चिंगारी अब खुली बगावत में बदलती नजर आ रही है। बादली से दबंग विधायक कुलदीप वत्स ने पार्टी के भीतर बैठे ‘मठाधीशों’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनके ताज़ा बयान न केवल कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक उलटफेर के संकेत भी दे रहे हैं।

वत्स ने साफ शब्दों में कहा कि अगर राहुल गांधी ने खुद को पार्टी से बड़ा समझने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस का भविष्य संकट में पड़ सकता है। उनका यह बयान सीधे तौर पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती देता नजर आता है।

सत्ता से संपर्क, संगठन से नाराजगी
वत्स के तेवर इसलिए भी खास हैं क्योंकि उन्होंने खुलकर स्वीकार किया है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के संपर्क में हैं। हालांकि उन्होंने इसे अपने क्षेत्र के विकास से जोड़कर बताया और सीएम सैनी को ‘राजा’ कहकर संबोधित किया, लेकिन राज्यसभा चुनाव से पहले सीएम का उनके घर जाना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है।

‘मठाधीशों’ पर सीधा हमला
वत्स ने कांग्रेस की मौजूदा हालत के लिए पार्टी के भीतर बैठे उन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया, जिन्हें उन्होंने ‘मठाधीश’ कहा। उनका आरोप है कि पार्टी ने इन नेताओं को सब कुछ दिया, लेकिन आज वही कांग्रेस की छवि खराब कर रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों पर कार्रवाई न होने से भी वत्स नाराज हैं। उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि ये विधायक पैसे के लिए नहीं बिके, बल्कि इनके पीछे “दिल्ली में बैठे किसी बड़े आका” का हाथ है। यह बयान पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

“मुझे खरीदने वाला नोट नहीं छपा”
अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए वत्स ने दो टूक कहा-“मुझ पर कोई दबाव नहीं है, न ही कोई मुझे खरीद सकता है। मुझे खरीदने वाला कोई नोट आज तक छपा ही नहीं है।” उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि वे खुद को ‘ईमानदार और दबंग’ छवि में स्थापित करना चाहते हैं, जो किसी भी सियासी दबाव में झुकने को तैयार नहीं।

हुड्डा से दूरी नहीं, सिस्टम से घुटन
वत्स ने यह भी स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके लिए पिता समान हैं और उनसे कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। लेकिन उन्होंने पार्टी के “खोखले सिस्टम” पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वे अंदर ही अंदर घुटन महसूस कर रहे हैं।

5 मई का सस्पेंस: बड़ा धमाका तय?
सबसे अहम बात यह है कि वत्स ने 5 मई को अपने जन्मदिन पर “बड़ा फैसला” लेने का ऐलान किया है। इससे हरियाणा की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है—

क्या वत्स कांग्रेस छोड़ेंगे?
क्या वे भाजपा या किसी अन्य विकल्प की ओर बढ़ेंगे? या फिर पार्टी के अंदर ही बड़ा राजनीतिक दबाव बनाएंगे? फिलहाल, उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा करने और आलाकमान की कार्रवाई का इंतजार करने की बात कही है।

कुलदीप वत्स की यह बगावत हरियाणा कांग्रेस के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। राज्यसभा चुनाव के बाद उभरे असंतोष ने अब खुलकर रूप ले लिया है। अगर पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात नहीं संभालता, तो 5 मई को होने वाला “सियासी धमाका” कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है।

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