विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने शुक्रवार को संसद में पाकिस्तान को देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध और अत्याचार के लिए आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भारत ऐसे मामलों पर बहुत बारीकी से नज़र रखता है और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के रुख को दोहराते हुए पाकिस्तान की आलोचना की, जहाँ पड़ोसी देश को “मानवाधिकारों के हनन और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न” के लिए नामित और शर्मिंदा किया गया था।

जयशंकर ने कहा कि हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर बहुत बारीकी से नज़र रखते हैं। फरवरी (2025) में हिंदू समुदाय के खिलाफ़ अत्याचार के 10 मामले और सिख समुदाय से जुड़ी तीन घटनाएँ हुईं। अहमदिया समुदाय से जुड़े दो मामले और ईसाई समुदाय से जुड़ा एक मामला था। हम इन मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते हैं। उन्होंने कहा कि UNHRC में हमारे प्रतिनिधि ने बताया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जहाँ “मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यवस्थित हनन राज्य की नीतियाँ हैं, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकृत आतंकवादियों को पनाह देती हैं। 

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद नवीन जिंदल ने पंजाब के पटियाला में सेना के एक अधिकारी के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर की गई मारपीट का मुद्दा शुक्रवार को लोकसभा में उठाया और घटना की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की। उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया और कहा कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी भी होनी चाहिए। हरियाणा के कुरुक्षेत्र से लोकसभा सदस्य और उद्योगपति जिंदल ने कहा, ‘‘गत 13 मार्च को पटियाला में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। यह पूरे फौजी समुदाय की गरिमा पर हमला है…पुलिस का काम लोगों की रक्षा करना है। यहां तो रक्षक ही भक्षक बन गए।’’ 

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