मंगलवार को विपक्ष के भारी हंगामे के कारण विधानसभा की कार्रवाई को कल 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर हंगामा करने लगे। इसके बाद विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्रवाई को स्थगित कर दिया।

महाना ने सदन में विरोध प्रदर्शन को लेकर स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना एक स्वाभाविक और मान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसकी भी एक मर्यादा और सीमा होती है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक पद पर आसीन होती हैं और राजनीति से ऊपर उठकर सरकार का संरक्षण करती हैं, इसलिए उनका सम्मान होना ही चाहिए। स्पीकर सतीश महाना ने कहा कि राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वे संविधान के दायरे में कार्य करती हैं। ऐसे में सदन के भीतर उनके प्रति असम्मानजनक व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बात समझने की जरूरत है कि विरोध के कई लोकतांत्रिक तरीके मौजूद हैं।

महाना ने स्पष्ट किया कि विधायक अपनी सीट पर बैठकर विरोध दर्ज करा सकते हैं या वॉकआउट जैसे संसदीय उपाय अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सभी तरीके लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं और पहले से स्वीकृत भी हैं। हालांकि, स्पीकर ने सदन के बीचोंबीच प्लेकार्ड लेकर आने को अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का आचरण विधानसभा की गरिमा और नियमों के खिलाफ है और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के दायरे में सही नहीं ठहराया जा सकता। स्पीकर के इस बयान को हाल के विधानसभा सत्र के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए सदन की गरिमा और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान को बनाए रखें।

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