वर्ष 2011 में मुरे कंपनी पुल के पास एसबीआई के एटीएम बूथ से गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी जासूस को शनिवार को एडीजे आठ की कोर्ट ने 10 साल की सजा सुना दी। एटीएस ने उसके खिलाफ रेलबाजार थाने में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का अपराध करने की साजिश की धारा में मुकदमा दर्ज कराया था।

देश की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को मिलने की जानकारी काफी समय से लखनऊ एटीएस को मिल रही थीं। वर्ष 2011 में एटीएस लखनऊ के एसपी रविंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए टीमें शहर में डेरा जमाए थीं। इसी दौरान 18 सितंबर 2011 को टीम के दरोगा विमलेश कुमार राय सेंट्रल स्टेशन पर थे, तभी जानकारी मिली कि रांची थाना जगन्नाथपुर, धुर्वा का रहने वाला फैसल रहमान उर्फ गुड्डू आईएसआई का एजेंट है और मुर कंपनी पुल स्थित एसबीआई के एटीएम पर खड़ा है। एटीएस की दो टीमों ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उसके पास से संवेदनशील नक्शे होटलों में रुकने के कैश मेमो डॉक्टर का पर्चा आदि बरामद हुए थे।
मामला एडीजे आठ राम अवतार यादव की कोर्ट में चल रहा था। अभियोजन पक्ष ने मुकदमे में 11 गवाहों को पेश किया। कोर्ट ने फैसल रहमान को दोषी पाकर 10 साल कारावास व 50 हजार जुर्माने की सजा सुना दी। पूछताछ में फैसल ने बताया था कि वह बीए तक शिक्षित था और उच्च शिक्षा के लिए रूस में करीब तीन साल रहा था। इसके बाद वह कराची, जमशेद रोड स्थित अपनी मौसी जाकिया मुमताज के पास गया और तीन माह रहकर वापस आया। 1997 में फैसल ने अपनी मौसेरी बहन साइमा फैसल से कराची में शादी की, जो कि गवर्नमेंट इस्लामिया कॉलेज में लेक्चरर थी।

आईएसआई अधिकारी की बात मानने के बाद फैसल को कराची के आईएसआई आफिस में 25 दिन ट्रेनिंग दी गई। इस दौरान भारतीय सेना वी विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद उसे भारत भेजा गया। यहां करीब आठ, नौ साल आईएसआई के लिए वह काम करता रहा। इस दौरान उसे करीब 12 लाख रुपये आईएसआई ने दिए, जो कराची के बैंक खाते में जमा होते थे। फैसल हवाला के जरिए रुपया देश में मंगवाता था। फैसल रांची, प्रयागराज, झांसी, बबीना, कानपुर कैंट की सूचनाएं इंटरनेट के माध्यम से भेजता था।

 

 

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