यूपी के सुल्तानपुर में इन दिनों दो बड़े क्षत्रिय माननीयों में चल रही रार चर्चा में है. इसने जिले से लेकर प्रदेश तक की राजनीति में हलचल मचा रखी है. एक बीजेपी के मौजूदा विधायक हैं तो दूसरे सपा के पूर्व विधायक और उनके पूर्व ब्लॉक प्रमुख भाई हैं. दरअसल, विधायक विनोद सिंह के सामने हैं बाहुबली ब्रदर्स- चंद्रभद्र सिंह और यशभद्र सिंह. ये दोनों भाई सोनू-मोनू के नाम से फेमस हैं.   

हुआ हूं कि बीते दिनों अयोध्या कोर्ट परिसर में चेकिंग के दौरान एक बैग में असलहे और कारतूस मिले थे. उसी दिन यशभद्र सिंह उर्फ मोनू की गवाही होनी थी. हालांकि, इस घटना के बाद मोनू कोर्ट नहीं आए. क्योंकि, इससे पहले 2014 में भी अयोध्या कचहरी में उनपर प्राण घातक हमला हो चुका है.

बता दें कि सुल्तानपुर में चल रही राजनीतिक दुश्मनी का मामला अब अयोध्या कोर्ट तक पहुंच गया है. पूर्व ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह ने अयोध्या कोर्ट में पेशी पर नहीं जाने का फैसला किया. उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया है, जिसकी वजह एक पुराना मुकदमा है. 

कोर्ट में अपनी जान को खतरा बताया 

यशभद्र सिंह ‘मोनू’ ने अयोध्या कोर्ट में अपनी जान को खतरा बताया. यह मामला 2014 में हुए एक हमले से जुड़ा है, जिसका मुकदमा फिर से शुरू हुआ है. इस मामले में विधायक विनोद सिंह और पूर्व ग्राम प्रधान कमला देवी आरोपी हैं. पुलिस ने 2020-21 में चार्जशीट दाखिल की थी. कोर्ट ने यशभद्र सिंह की याचिका पर दोबारा वारंट जारी किया था. 

कोर्ट परिसर में मिला असलहा

यशभद्र सिंह ने कहा कि वह शनिवार को सुरक्षा कारणों से पेशी पर नहीं गए. जिस दिन मोनू सिंह को कोर्ट में पेश होना था, उसी दिन कोर्ट परिसर में एक संदिग्ध मिला, जिसके पास से दो अवैध तमंचे और कारतूस बरामद हुए.  

हमले की आशंका और पुरानी दुश्मनी

यशभद्र सिंह मोनू के अनुसार, 2014 में भी उन पर कोर्ट में हमला हुआ था, जिसमें जैनेंद्र शर्मा नाम का एक व्यक्ति पकड़ा गया था. पुलिस की कॉल डिटेल रिपोर्ट के मुताबिक, विनोद सिंह लगातार हमलावरों के संपर्क में थे. इस रिपोर्ट के आधार पर विनोद सिंह को आरोपी बनाया गया था. मोनू सिंह ने आशंका जताई है कि इस बार भी उनके साथ कुछ ऐसा ही होने वाला था, जिसकी वजह से वे पेशी पर नहीं गए. 

राजनीतिक दुश्मनी की नई कड़ी

आपको बताते चलें कि सोनू-मोनू और विनोद सिंह के बीच पिछले डेढ़ दशक से दुश्मनी चली आ रही है. हाल ही में विनोद सिंह ने सोनू-मोनू के स्वर्गीय पिता की मूर्ति हटाने के लिए डीएम को पत्र लिखा था, जिसके जवाब में बीजेपी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने इसका विरोध करते हुए डीएम को पत्र लिखा. इस पर नाराज होकर विनोद सिंह ने देवेंद्र प्रताप की शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ से की है.  

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