उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व सांसद आजम खान मंगलवार (23 सितंबर) को सीतापुर जेल से रिहा हो गए। दोपहर लगभग 12 बजे जेल से बाहर निकलने के बाद उन्होंने समर्थकों का धन्यवाद किया और राजनीति में फिर से सक्रिय होने का इरादा जताया।

क्यों हुई थी रिहाई में देरी?
आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से 72 मामलों में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन दो मामलों में जुर्माना (3000 रुपए) जमा नहीं होने की वजह से उनकी रिहाई में कुछ देर हुई। जेल प्रशासन ने बताया कि जुर्माना जमा होने के बाद ही आजम खान को जेल से छोड़ा जा सकता है। इस औपचारिकता के पूरा होने के बाद दोपहर में उन्हें रिहा कर दिया गया।

जेल के बाहर भारी भीड़
रिहाई की खबर मिलते ही सीतापुर जेल के बाहर समाजवादी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता और समर्थक जमा हो गए। रामपुर, मेरठ, मुरादाबाद समेत आसपास के इलाकों से लोग आए थे। उन्होंने नारे लगाकर आजम खान का स्वागत किया। सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी भारी मात्रा में तैनात था।

परिवार में खिंचतान और सुरक्षा व्यवस्था
आजम खान के बेटे अब्दुल वाजिद उर्फ अदीब को सुरक्षा कारणों से जेल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था, जिससे परिवार में नाराजगी देखी गई। जेल प्रशासन ने गाड़ियों की सूची बनाकर सिर्फ उन्हीं को अंदर जाने दिया।

आजम खान का राजनीतिक भविष्य
रिहाई के बाद आजम खान रामपुर लौटेंगे, जहां उनका भव्य स्वागत होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या आजम खान समाजवादी पार्टी में ही रहेंगे या अन्य राजनीतिक दलों में शामिल होंगे। बसपा ने भी उनका स्वागत करने का संकेत दिया है, लेकिन सपा के अंदरूनी सूत्र उनकी वफादारी पर भरोसा जताते हैं।

समर्थकों का उत्साह
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्विटर पर आजम खान की रिहाई पर खुशी जताई और उन्हें बधाई दी। आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा ने कहा कि 23 महीने के इंतजार के बाद आज उनका पति आजाद हो गया है और अब सब ठीक होगा।

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