देश में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई (B.R. Gavai) पर जूता फेंके जाने की घटना को लेकर कड़ी निंदा हो रही है। कुछ लोगा इसे संविधान पर हमला बता रहे हैं तो कुछ इसे एक शाजिस करार दे रहे हैं। इसी कड़ी में इस घटना को लेकर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा कि जूता फेंकना गलत है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश का बयान भी न्यायिक मर्यादा से परे था।

शनिवार (11 अक्टूबर 2025) को मीडिया से बातचीत में जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा, “हमने अब तक कई मुख्य न्यायाधीश देखे हैं, लेकिन किसी ने भी ऐसी टिप्पणी नहीं की। चीफ जस्टिस को अपनी मर्यादाओं में रहकर न्यायिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी।”उन्होंने आगे कहा कि “यद्यपि अदालत की गरिमा का अपमान किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता, परंतु न्यायपालिका की भाषा और आचरण में भी अनुशासन बना रहना चाहिए।

रामभद्राचार्य ने लोगों से अपील की कि वे अदालत की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखें, साथ ही न्याय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्तियों को भी जनभावनाओं का सम्मान करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा, “जूता फेंकना असंस्कार और अहिंसा के मार्ग से भटकाव है, लेकिन न्याय के मंदिर में बैठे व्यक्ति से भी संयम और संतुलन अपेक्षित है।
 

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसला सुनाते हुए जगतगुरु स्वामी राम भद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलपति स्वामी राम भद्राचार्य के खिलाफ चल रहे आपत्तिजनक वीडियो को 48 घंटे के भीतर सभी इंटरनेट प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (Facebook, Instagram) और Google LLC (YouTube) को निर्देश दिया है कि याचियों से प्राप्त URL लिंक लेकर संबंधित वीडियो को तुरंत हटाएं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को तय की है।

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