भारतीय वायुसेना के कार निकोबार एयरबेस का अपग्रेडेडरनवे आज हमारे सीडीएस जनरल अनिल चौहान के हाथों उद्घाटन किया गया है। यह कदम सिर्फ हमारे सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने के लिए नहीं बल्कि ईस्टर्न इंडियन ओशियन में भारत की सैन्य ताकत को भी और बढ़ाने के लिए उठाया गया है। यह एयरबेस अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है जो हमारे समुद्र सुरक्षा के लिहाज से एक अहम स्थान है। यह एयरबेस काफी ऐतिहासिक भी है। शुरुआत में 1942 से 1945 तक जब जापान ने इन द्वीपों पर कब्जा किया था तब यहां का रनवे जापानियों द्वारा बनाया गया था। फिर 1956 में भारतीय वायुसेना ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया। इस स्टेशन का मुख्य काम था रिफ्यूलिंग के रूप में काम करना ताकि जो विमान बे ऑफ बंगाल के ऊपर से गुजरते हैं उन्हें ईंधन मिल सके।

इस एयरफोर्स स्टेशन का महत्व बढ़ता चला गया और 1967 में इसका रनवे भी बढ़ाया गया। 1982 में यहां Mi8 हेलीकॉप्टरभी तैनात हुए। इतना ही नहीं 2004 में जब सुनामी आई तब इस एयरबेस को काफी नुकसान हुआ था। लेकिन हमारे जवानों ने उसे सिर्फ 3 महीने में फिर से पूरी तरह से तैयार कर दिया। यह भारतीय वायुसेना के जांबाज कर्मियों की मेहनत और तत्परता का उदाहरण था। देखिए सबसे पहले हम बात करेंगे नई सतह का निर्माण। 

कार निकोबार वायुसेना अड्डे का रणनीतिक महत्व

कार निकोबार वायुसेना पोर्ट ब्लेयर से लगभग 535 किलोमीटर दक्षिण में निकोबार जिले में स्थित है – जो भारत का सबसे दक्षिणी रणनीतिक क्षेत्र है और मलक्काजलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का अधिकांश हिस्सा गुजरता है। यह वायु सेना भारतीय वायु सेना की एक प्रमुख अग्रिम चौकी के रूप में ऐतिहासिक महत्व रखती है और समुद्री निगरानी, ​​त्वरित हवाई प्रतिक्रिया और पनडुब्बी रोधी तथा तटीय रक्षा अभियानों के लिए समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह अंडमान और निकोबार कमांड (एएनसी) के अंतर्गत भी आता है। ये भारत की एकमात्र त्रि-सेवा थिएटर कमांड है जिसमें सेना, नौसेना और वायु सेना एकीकृत हैं।

एक्ट ईस्ट नीति पर फोकस

कमान के एक अधिकारी ने बताया सीडीएस की यह यात्रा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व और एक्ट ईस्ट नीति पर हमारे ध्यान, साथ ही क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को उजागर करती है। बाद में जनरल चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की भू-रणनीतिक क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में सैन्य अभियानों का समर्थन करने में एएनसी द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर किया। सीडीएस ने अंडमानऔर निकोबार कमांड की परिचालन भूमिका, चल रहे बुनियादी ढांचा विकास और सेना, नौसेना, वायु सेना और तटरक्षक बल के बीच संयुक्त सेवाओं के एकीकरण के स्तर की भी समीक्षा की। जनरल चौहान ने क्षेत्र में निगरानी, ​​निवारण और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने के लिए निर्बाध समन्वय के महत्व पर जोर दिया।

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