प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ 2025 अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन बन चुका है। 13 जनवरी से शुरू हुआ यह पर्व अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित कर चुका है, जो कि दुनिया के कई देशों की जनसंख्या से भी अधिक है। महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं की संख्या ने इतिहास रच दिया है, और यह आयोजन पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों से इस महाकुंभ का आयोजन बहुत भव्य और सफल हो रहा है। कुंभ के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी, और यह संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। सरकार और प्रशासन ने हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके कारण ही इस आयोजन को अब तक का सबसे बड़ा महाकुंभ माना जा रहा है।

यूएस सेंसस ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं की संख्या 50 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है, जो कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों की जनसंख्या से भी ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका (34.2 करोड़), पाकिस्तान (25.7 करोड़), रूस (14 करोड़) और ब्राजील (22.1 करोड़) की जनसंख्या भी इससे कम है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि महाकुंभ का महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था किसी भी सीमा से परे है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस बार कुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या एक नया रिकॉर्ड बनाएगी। शुरू में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान था, लेकिन यह आंकड़ा अब तक के 50 करोड़ से भी पार जा चुका है। इसके अलावा, 14 फरवरी तक यह संख्या 50 करोड़ के ऊपर पहुंच चुकी थी, और 12 दिन और स्नान पर्व बाकी हैं, जिसके चलते यह संख्या 55 से 60 करोड़ तक जा सकती है। अब तक के महाकुंभ में श्रद्धालुओं ने विशेष रूप से कुछ स्नान पर्वों में भारी संख्या में भाग लिया।

सर्वाधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में स्नान करने पहुंचे, जहां लगभग 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। इसके अलावा, मकर संक्रांति के दिन 3.5 करोड़, बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ और माघी पूर्णिमा पर 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। अन्य पर्वों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जैसे 30 जनवरी और 1 फरवरी को 2-2 करोड़ श्रद्धालु संगम में स्नान करने पहुंचे। महाकुंभ 2025 में अब तक आए श्रद्धालुओं की संख्या ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को यह दिखा दिया कि भारतीय धर्म और संस्कृति में श्रद्धा की कोई सीमा नहीं होती। संगम पर हुए इस भव्य आयोजन ने पूरे विश्व में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि जब आस्था और धर्म की बात आती है, तो कोई भी संख्या या दूरी मायने नहीं रखती।

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