उत्तराखंड की धामी सरकार की ओर से जनवरी माह में लागू समान नागरिक संहिता के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसके खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने दायर याचिका की जानकारी देते हुए बताया कि देश के संविधान, लोकतंत्र और कानून के राज को बनाए रखने के लिए जमीयत ने इस उम्मीद के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया है कि इंसाफ मिलेगा।
मदनी ने दो टूक कहा कि मुल्क में अदालत ही हमारा आखिरी सहारा है। उन्होंने साफ कहा कि हम शरीयत के खिलाफ किसी भी कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन अपनी शरीयत और मजहब से समझौता नहीं कर सकता। मौलाना ने कहा कि सवाल मुसलमानों के पर्सनल लॉ का नहीं बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान को उसकी मौजूदा स्थिति में बनाए रखने का है।