कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा ‘वोट चोरी’ और ‘चुनाव चुराने’ के आरोपों के बीच, चुनाव आयोग ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन आरोपों का खंडन करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जोर दिया।

चुनाव आयोग सभी के लिए समान

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग न तो विपक्ष देखता है और न ही सत्ताधारी दल, बल्कि सभी को समान रूप से देखता है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, 18 साल से ऊपर के हर नागरिक को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना चाहिए। चूंकि सभी राजनीतिक दल चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं, इसलिए उनके बीच भेदभाव का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने साफ किया, ‘चुनाव आयोग के लिए न तो कोई विपक्ष है और न ही कोई सत्ताधारी दल, क्योंकि सभी समान हैं, और आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।’

‘वोट चोरी’ जैसे शब्द संविधान का अपमान

राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कुछ नेता मतदाताओं को गलत जानकारी देकर और भय फैलाकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ‘वोट चोरी’ जैसे शब्दों को संविधान का अपमान बताया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं और सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ स्तर के अधिकारी मिलकर सत्यापन, हस्ताक्षर और वीडियो प्रशंसापत्र भी दे रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार ने चिंता जताई कि जिला पार्टी अध्यक्षों और नामित बीएलओ द्वारा भेजे गए ये सत्यापित दस्तावेज़ और प्रशंसापत्र या तो उनके राज्य या राष्ट्रीय नेताओं तक नहीं पहुंच रहे हैं, या फिर उन्हें जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम फैलाने के लिए किया जा रहा है।

चुनाव आयोग का यह जवाब ऐसे समय में आया है जब बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद जारी है और विपक्ष इसे मतदाताओं के अधिकार छीनने का प्रयास बता रहा है।

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