मुज़फ्फरनगर। मुज़फ्फरनगर की एक महिला को अचानक हुए असामान्य रक्तस्राव ने उस सच्चाई से रूबरू कराया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। शुरुआती जांच में सब कुछ सामान्य दिखा, लेकिन जब विस्तार से टेस्ट हुए तो पेट के भीतर फुटबॉल के आकार का एक बड़ा ट्यूमर मिला, जिसका वजन लगभग साढ़े आठ किलो (8.5 kg) था। समय पर मिली सही सलाह और डॉक्टरों की विशेषज्ञता ने इस महिला की जिंदगी बचा ली।

दरअसल, मंसूरपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की दो बच्चों की मां सुशीला पिछले कुछ महीनों से लगातार असामान्य रक्तस्राव से परेशान थीं। चालीस साल से कम उम्र में मेनोपॉज़ होना बेहद दुर्लभ है, इसलिए इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया गया। उन्होंने पहले स्थानीय गायनेकोलॉजिस्ट को दिखाया, जहां से उन्हें मैक्स हॉस्पिटल वैशाली की डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (गायनेकोलॉजी) डॉ. स्वाति से परामर्श लेने की सलाह दी गई। डॉ. स्वाति की ओपीडी उस समय मुज़फ्फरनगर में आयोजित की जा रही थी। वहीं पर महिला ने पहली बार उनसे मुलाकात की और प्रारंभिक जांच कराई। इसके बाद उन्हें आगे की विस्तृत जांच और इलाज के लिए वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रेफर किया गया।

वहां किए गए सीटी-स्कैन और अन्य जांच में पता चला कि उनके अंडाशय में यह विशाल ट्यूमर मौजूद था, साथ ही पित्ताशय में पथरी और पेट में अतिरिक्त तरल भी पाया गया। बायोप्सी रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि यह अर्ली स्टेज ओवेरियन कैंसर है। डॉ. स्वाति और उनकी टीम ने चार घंटे लंबी जटिल सर्जरी की, जिसमें गर्भाशय, दोनों अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, पित्ताशय और आसपास के प्रभावित ऊतक को सावधानीपूर्वक हटाया गया। डॉक्टरों के अनुसार सबसे बड़ा खतरा यह था कि ट्यूमर ऑपरेशन के दौरान फट न जाए क्योंकि ऐसा होने पर कैंसर पूरे शरीर में फैल सकता था। 70–80 प्रतिशत संभावना के बावजूद टीम ने इसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया, और यही वजह रही कि महिला को कीमोथैरेपी या रेडिएशन की आवश्यकता नहीं पड़ी।

आमतौर पर कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज को कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी दी जाती है, जिसके कारण शरीर कमजोर हो जाता है और कई तरह के दुष्प्रभाव सामने आते हैं। लेकिन सुशीला का मामला अलग रहा। ऑपरेशन को अब छह माह बीत चुके हैं और वह बिना किसी जटिलता के पूरी तरह स्वस्थ हैं। न उन्हें इलाज के बाद कोई अतिरिक्त परेशानी हुई और न ही शरीर पर किसी तरह का नकारात्मक असर पड़ा। यह इस बात का प्रमाण है कि समय पर पहचान और सटीक सर्जरी से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी सामान्य जीवन संभव है।

ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें आईसीयू से बाहर कर दिया गया, और पांच दिन के भीतर उन्हें पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि अब उनका नियमित फॉलो-अप बेहद जरूरी रहेगा ताकि भविष्य में बीमारी की कोई संभावना न रहे। इस केस से स्पष्ट संदेश मिलता है कि असामान्य रक्तस्राव, पेट दर्द या समय से पहले मेनोपॉज़ जैसी स्थिति को कभी हल्के में न लें समय पर की गई जांच न केवल बीमारी को पकड़ा जा सकता है, बल्कि जीवन भी बचाया जा सकता है।

जानसठ रोड स्थित गोल्डन एरा रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता करते हुए मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली की डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (गायनेकोलॉजी), डॉ. स्वाति ने कहा, “इस तरह की सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। सबसे बड़ी चिंता होती है कि ट्यूमर पेट के भीतर फट न जाए, क्योंकि ऐसा होने पर मरीज की स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है। लेकिन हमारी टीम ने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता से ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया, और मरीज को बिना कीमोथैरेपी व रेडिएशन के स्वस्थ जीवन के मार्ग पर भेज दिया।” उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे साल में कम से कम एक बार पेट का अल्ट्रासाउंड करवाकर किसी संभावित बीमारी का समय रहते पता लगाएं।

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