मथुरा के वृंदावन में होली मेले के दौरान मुसलमानों की भागीदारी और उनके द्वारा दुकानें लगाने पर पाबंदी लगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “गैर संवैधानिक और विभाजनकारी” बताया है।

“यह देश की गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला” 
मौलाना रजवी ने कहा कि पहले महाकुंभ में अखाड़ा परिषद ने मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाई थी, और अब वृंदावन में यह प्रतिबंध देश की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ फिरकापरस्त ताकतें ऐसी घोषणाएं कर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को तोड़ने की साजिश रच रही हैं।

“आर्थिक तौर पर कमजोर करने की साजिश”
मौलाना शहाबुद्दीन ने इस फैसले को मुसलमानों को आर्थिक रूप से हाशिए पर डालने की सोची-समझी चाल करार दिया। उन्होंने कहा, “मुसलमान व्यापार और रोजगार में बराबरी से भागीदार हैं, लेकिन कुछ ताकतें उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।”

“हम नफरत को नाकाम करेंगे!”
मौलाना ने कहा कि भारत की पहचान सद्भाव और भाईचारे से होती है, और हिंदू-मुस्लिम मिलकर ऐसी विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। उन्होंने देशवासियों से सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “हम भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को टूटने नहीं देंगे!”

फैसले पर बढ़ता विवाद – प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
वृंदावन मेले में मुसलमानों पर प्रतिबंध को लेकर अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह के फैसले देश के संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

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