वक्फ संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

इसी बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विधेयक के प्रावधानों पर अपनी चिंता से अवगत कराने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जल्द से जल्द मुलाकात का समय देने का अनुरोध किया है, इससे पहले कि वह इस बिल पर अपनी स्वीकृति दें।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने महासचिव मौलाना फजलुर रहिम मुजद्ददी द्वारा लिखे गए पत्र की सामग्री का खुलासा करते हुए कहा कि इस अधिनियम में किए गए संशोधन में वक्फ संस्थाओं के प्रशासन और स्वायत्तता से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो ऐतिहासिक रूप से धार्मिक और धर्मार्थ गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं। राष्ट्रपति से मिलने का उद्देश्य हाल ही में पारित विधेयक पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करना है और इसके देशभर में मुस्लिम समुदाय पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करना है।

बोर्ड के महासचिव ने पत्र में कहा है, “हमें विश्वास है कि अधिनियम की धारा के प्रावधानों पर पुनः विचार करना आवश्यक है, क्योंकि यह भारतीय संविधान में गारंटीशुदा मौलिक अधिकारों, विशेषकर धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा से असंगत है।”

पत्र के अंत में राष्ट्रपति मुर्मू से यह अनुरोध किया गया है कि वह मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मुलाकात के लिए समय दें, ताकि हम अपनी चिंताओं को प्रस्तुत कर सकें और संवैधानिक ढांचे के भीतर संभावित समाधान पर चर्चा कर सकें।

उल्लेखनीय है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर राज्यसभा में गुरुवार को चर्चा शुरू हुई और लगातार चली बैठक के बाद शुक्रवार तड़के यह विधेयक पारित हो गया। इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े। लोकसभा एक दिन पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी।

इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है। विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा की बैठक (शुक्रवार) रात 2:30 बजे के बाद तक चली। विपक्ष के सभी संशोधन खारिज हो गए।

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