शहर के वीआईपी रोड पर बीते रविवार को हुए भीषण लैंबॉर्गिनी हादसे में पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। अरबपति तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा का नाम अब आधिकारिक तौर पर जांच में सामने आया है। भारी दबाव के बीच पुलिस ने न सिर्फ लग्जरी कार को सीज कर दिया है, बल्कि लापरवाही बरतने वाले ग्वालटोली थाना प्रभारी को भी लाइन हाजिर कर दिया है।

बाउंसरों ने गोद में उठाकर निकाला, वीडियो ने खोली पोल
रविवार को रेव-3 मॉल के पास जब तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी ने ई-रिक्शा और राहगीरों को रौंदा, तो मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ दिखा कि कार के पीछे चल रहे बाउंसरों ने ड्राइविंग सीट से शिवम को गोद में उठाकर बाहर निकाला और सुरक्षित ले गए। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील का दावा है कि कार शिवम नहीं बल्कि उनका ड्राइवर चला रहा था।

पुलिस की शुरुआती ‘नरमी’ और फिर ‘हंटर’
शुरुआत में पुलिस का रुख काफी ढीला नजर आया। अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और चर्चा फैल गई कि चालक को ‘हार्ट अटैक’ आया था। इतना ही नहीं, थाने में पुलिसकर्मी महंगी कार के साथ सेल्फी लेते भी नजर आए। लेकिन किरकिरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने सख्त तेवर अपनाए:

– SHO पर गिरी गाज: लापरवाही के आरोप में ग्वालटोली एसएचओ संतोष कुमार गौड़ को तत्काल लाइन हाजिर कर दिया गया।
– घर पर पुलिस का पहरा: पुलिस टीम जब शिवम के घर पूछताछ के लिए पहुँची, तो गेट नहीं खोला गया।

कानूनी पेंच: गिरफ्तारी होगी या नहीं?
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281, 125A, 125B और 324(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। चूंकि इन धाराओं में सजा 7 साल से कम है, इसलिए कानूनी तौर पर तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है। मंगलवार को कोर्ट में जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी है।

कमिश्नर का संदेश: “कानून सबके लिए बराबर”
पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि गाड़ी लैंबॉर्गिनी हो या कोई साधारण कार, कानून की नजर में सब समान हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि घायलों को न्याय मिलेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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