राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लव जिहाद और धार्मिक कन्वर्जन के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। आरएसएस के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि जबरदस्ती, लालच या धोखे से किए गए धर्मांतरण स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसी कवायद समाज में अशांति पैदा कर सकती है। यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के लिए भी एक गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में चिंता तो सब लोगों ने व्यक्त की है, जिसे लेकर दो प्रमुख काम हो रहे।

लव जिहाद पर क्या बोले सुनील आंबेकर

सुनील आंबेकर ने लव जिहाद और धार्मिक कन्वर्जन को लेकर कई बातों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक तो लोगों के बीच में इसे लेकर जागृति हो। इसे लेकर साजिश कैसे की जाती है, इसके बारे में जानकारी हो। दूसरी बात है कि समाज के सभी लोगों तक अपने साधु संतों के जरिए एक जो हिंदू धर्म का विशेष रूप से ज्ञान है, वो पहुंचे। हिंदू धर्म की एकता की जो विशेष अनुभूति है, उसके भाव जो हैं वो सभी लोगों तक पहुंचे। इसके लिए कई प्रकार के प्रयास हो रहे।

युवाओं को लेकर क्या कहा

आंबेकर ने आगे कहा कि हम कोशिश कर रहे कि साधु-संतों की यात्राएं समाज के सभी वर्गों में जाए। बौद्धिक स्तर पर भी ये बातें सभी को समझाई जाए। युवाओं, युवतियों के बीच भी इस मुद्दे को ले जाएं। इसके लिए प्रयास कई सारे संगठन कर रहे हैं। यह लगातार किया जा रहा। उन्होंने कहा कि संघ का मानना है समाज को इस चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए। धर्मांतरण के खिलाफ संघर्ष केवल हिंदू धर्म की रक्षा के बारे में नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान की रक्षा के बारे में भी है।

राजस्थान सरकार ला रही नया बिल

सुनील आंबेकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजस्थान सरकार एक नया बिल लाने का प्लान कर रही। राजस्थान गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण निषेध विधेयक, 2025 नाम से सख्त वर्जन भजनलाल सरकार पेश करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। भजनलाल शर्मा मंत्रिमंडल ने पहले ही इस बिल में कुछ बदलावों को मंजूरी दे दी है। इससे प्रस्तावित कानून और भी सख्त हो जाएगा।

इस बिल के ड्राफ्ट में कई बड़ी बातें

राजस्थान सरकार की ओर से इस बिल के ड्राफ्ट में कई बातों का जिक्र है। इसके मुताबिक, कोई व्यक्ति जबरदस्ती धर्म परिवर्तन का दोषी पाया जाता है, तो उसे सात से 14 साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। विधेयक में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किसी अन्य धर्म के व्यक्ति से शादी करता है, तो ऐसी शादी को अवैध माना जाएगा।

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