पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हिंसक विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार की ‘‘गलत नीतियों” के कारण भड़के। मुफ्ती ने मीडिया से कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लोगों से कई वादे किए थे, लेकिन पिछले छह वर्षों में उनमें से कुछ भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बुधवार को जो घटनाएं हुईं वह दिखाती हैं कि सहनशीलता पार हो गई है। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लद्दाख के लोग अपनी पहचान, संस्कृति, भूमि और नौकरियों की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के तहत शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “वे इस बात से निराश हैं कि कुछ नहीं हो रहा…अगर बाहर से लोग बड़ी संख्या में वहां आ गए तो उनमें से क्या बचेगा? उनकी संख्या तो बस कुछ लाख है।” मुफ्ती ने कहा कि केंद्र को लद्दाख के घटनाक्रम पर विचार करना चाहिए, जहां बुधवार को हिंसा भड़क उठी। 

उन्होंने कहा, “केंद्र को इस पर विचार करना चाहिए। लद्दाख जैसा खुशहाल और समृद्ध क्षेत्र आज जल रहा है। कश्मीर और जम्मू में जब हिंसा फैली हुई थी, तब भी लद्दाख शांतिपूर्ण रहा। कारगिल युद्ध में लद्दाख के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।” भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इस दावे पर कि कांग्रेस ने हिंसा भड़काई, मुफ्ती ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यह “लोगों का गुस्सा” है। 

उन्होंने कहा, “सरकार अपनी नाकामी स्वीकार नहीं करना चाहती और वे बलि का बकरा ढूंढ रही है। अगर कांग्रेस को इतना समर्थन मिलता, तो हालात अलग होते। यह अपनी पहचान, जमीन और नौकरियां खोने की आशंकाओं की एक सहज प्रतिक्रिया थी।” 

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