इस साल केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश) में चुनाव होने वाले हैं। नए साल के इस चुनावी मुकाबले में राज्यों में राजनीतिक दलों के सामने अलग समीकरण और चुनौतियां हैं। चुनावों के नतीजे चाहे जो भी हों लेकिन राष्ट्रीय राजनीति पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। फिर भी, इन चुनावों के नतीजों में कुछ ऐसी बातें हैं जिसका लोगों को इंतजार रहेगा। केरल, तमिलनाडु और बंगाल ये तीनों ऐसे राज्य हैं जहां कभी कमल नहीं खिला। बीजेपी बंगाल में पूरा जोर लगा रही है। इनमें से किसी भी राज्य में बीजेपी की जीत बड़े मायने रखेगी। वहीं विपक्षी दलों के सामने भी बड़ी चुनौती है। ममता बनर्जी को जहां बंगाल तो वहीं वामदल को केरल की चिंता है। एक के बाद कई हार के बाद राहुल गांधी के सामने कहीं बड़ी चुनौती है।

2026 में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतना होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 दिसंबर को दावा किया कि भाजपा आगामी चुनावों में दो-तिहाई बहुमत से जीत हासिल करके ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बेदखल कर देगी। बीजेपी प्रमुख चुनाव रणनीतिकार ने भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठियों के मुद्दों को उठाते हुए सत्तारूढ़ टीएमसी पर हमला किया। पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी। वामदल और कांग्रेस को काफी पीछे कर दिया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ टीएमसी अभी भी राज्य में एक प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु और केरल दोनों ही राज्य बीजेपी के लिए अभी भी एक कठिन चुनौती बने हुए हैं। बीजेपी ने केरल में नगर निगम चुनावों में अपनी सफलता से उपस्थिति दर्ज कराई और आगामी विधानसभा चुनावों में इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए लाभ अर्जित करने की उम्मीद कर रही है। वह तमिलनाडु में भी एक उपयुक्त सहयोगी की तलाश में है ताकि इस राज्य में अपनी पैठ बना सके, जहां वर्तमान में डीएमके का शासन है। असम के चुनाव पूर्वोत्तर में बीजेपी की स्थिति की परीक्षा लेंगे, क्योंकि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों से चुनौतियां मिल रही हैं।

वहीं राज्यों के इन चुनाव में सही मायने में कांग्रेस के साथ ही साथ राहुल गांधी के लिए भी बड़ी चुनौती है। एक के बाद एक कई हार के बाद राहुल गांधी को लेकर पार्टी के भीतर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी के भीतर ही एक वर्ग को अब राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी वाड्रा में उम्मीद की एक बड़ी किरण नजर आ रही है। राहुल गांधी को भी पता है कि उन्हें कांग्रेस के चेहरे के रूप में अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करना होगा। केरल में यदि कांग्रेस को जीत मिलती है तो राहुल गांधी को इससे मजबूती मिलेगी।

वहीं असम का चुनाव कांग्रेस के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है, पार्टी ने एक दशक से भी अधिक समय पहले राज्य पर अपनी पकड़ खो दी थी। केंद्रीय नेतृत्व का गौरव गोगोई पर दांव भी परखा जाएगा, क्योंकि पार्टी को उम्मीद है कि उनमें अपने दिवंगत पिता तरुण गोगोई के पदचिन्हों पर चलने की क्षमता है।

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