कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ संबंधी बयान पर चुनाव आयोग (ईसी) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आयोग ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और निराधार करार देते हुए सभी चुनाव अधिकारियों से अपील की है कि वे इस तरह के बयानों से प्रभावित हुए बिना निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से अपना कार्य करते रहें। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि इन दिनों इस तरह के आरोप आम हो गए हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं होता। ऐसे में अधिकारियों को चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ करें।

पारदर्शिता के लिए उठाए जा रहे कदम
आयोग ने स्पष्ट किया कि वह चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है और आवश्यक कदम उठा रहा है। चुनाव आयोग ने कहा कि उसका उद्देश्य हर मतदाता को निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव अनुभव प्रदान करना है।

राहुल गांधी का आरोप क्या था?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 23 जुलाई को दावा किया था कि देश में चुनाव प्रक्रिया के दौरान वोट की चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने कर्नाटक की एक लोकसभा सीट को चुना और उसकी वोटर लिस्ट को डिजिटल फॉर्मेट में कन्वर्ट किया। इसमें हमें छह महीने लगे। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि वोट की चोरी कैसे होती है, कौन करता है और नए वोटर्स कहां से लाए जाते हैं।” राहुल ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कागजी सबूत हैं, जिन्हें वे जनता और चुनाव आयोग के सामने पेश करेंगे।

सिद्धारमैया का समर्थन
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राहुल गांधी के दावे का समर्थन करते हुए कहा कि उनके पास वोट चोरी से जुड़े ठोस सबूत हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी आगामी 5 अगस्त को बेंगलुरु में प्रदर्शन करेंगे और चुनाव आयोग के अधिकारियों को दस्तावेज सौंपेंगे। चुनाव आयोग और कांग्रेस नेता के बीच यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब देश में चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज होती जा रही है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस अपने दावों को किस हद तक प्रमाणित कर पाती है और चुनाव आयोग इस पर आगे क्या रुख अपनाता है।

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