कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में कई स्तरों पर खामियां हैं और विभिन्न शहरों में इसके तहत आवंटित धन का पूरा उपयोग भी नहीं किया गया।

पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम कई स्तरों पर नीतिगत खामियों से ग्रसित है। इसकी सबसे बड़ी कमी यह रही है कि इस कार्यक्रम का फोकस पीएम 2.5 (2.5 माइक्रोन से छोटे कणों) के बजाय पीएम10 (10 माइक्रोन से छोटे कणों) को मापने और निगरानी तक सीमित कर दिया गया, जबकि हर साल हजारों लोगों की मौत का मुख्य कारण पीएम 2.5 होता है। .

उन्होंने कहा कि अब यह भी सामने आ रहा है कि कार्यक्रम का दायरा सीमित किए जाने के बावजूद धन का उपयोग बेहद निराशाजनक रहा है। रमेश के अनुसार, इस योजना के तहत धन पाने वाले 130 शहरों ने औसतन केवल 70 से 78.5 प्रतिशत तक ही धन का उपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में जहां हर साल वायु प्रदूषण एक सार्वजनिक स्वास्थ्य की आपात स्थिति और राष्ट्रीय शर्म का विषय बन जाता है, यहां भी इस योजना के तहत मिले धन का महज 33 प्रतिशत से भी कम खर्च किया गया है।

कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि फरीदाबाद ने सिर्फ 26.7 प्रतिशत, नोएडा ने 10 प्रतिशत से भी कम, और यहां तक कि प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी भी सिर्फ 48.85 प्रतिशत धन का उपयोग कर पाया, जो कि राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

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