कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि विपक्ष राज्यसभा के उपसभापति पद के चुनाव का बहिष्कार करेगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लोकसभा में पिछले सात वर्षों से उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं किए जाने के विरोध में लिया गया है। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि इस मुद्दे पर सरकार ने कोई सार्थक परामर्श भी नहीं किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि “हरिवंश 3.0″ विपक्ष के सुझावों के प्रति अधिक संवेदनशील होगा। ”हरिवंश 3.0” से तात्पर्य उच्च सदन के पूर्व उपसभापति हरिवंश के तीसरे कार्यकाल से है।

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हरिवंश दो बार उपसभापति रह चुके हैं और हाल में उनका उच्च सदन में कार्यकाल समाप्त हुआ है। राष्ट्रपति ने उन्हें तीसरी बार उच्च सदन के लिए मनोनीत किया है। रमेश ने विपक्ष के विरोध के कारण बताते हुए कहा, “पहला, मोदी सरकार ने सात वर्षों से लोकसभा में उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है, जो पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा ”दूसरा, राज्यसभा में उपाध्यक्ष के समकक्ष उपसभापति होता है। हरिवंश का दूसरा कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हुआ। इसके एक दिन बाद उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया और अब वह तीसरे कार्यकाल के लिए राजग के उम्मीदवार हैं।”

रमेश ने कहा कि इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि राष्ट्रपति द्वारा नामित किसी व्यक्ति को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए विचार किया गया हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के मन में हरिवंश के प्रति किसी भी तरह का अनादर नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध का तीसरा कारण यह है कि यह सब विपक्ष से बिना किसी सार्थक परामर्श के किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “इन तीन कारणों से और विरोध के तौर पर विपक्ष ने 17 अप्रैल को होने वाले उपसभापति चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।”

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राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव 17 अप्रैल को होना है। सत्तारूढ़ राजग यह कोशिश कर सकता है कि हरिवंश इस पद पर पुनः निर्वाचित हों। हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए नामित किया और उन्होंने 10 अप्रैल को शपथ ली। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जे पी नड्डा ने विभिन्न दलों के नेताओं से हरिवंश के पुनर्निर्वाचन को लेकर चर्चा की है और उनके नाम पर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने लोकसभा में 2019 से उपाध्यक्ष पद रिक्त रहने के बीच उपसभापति के पद के चुनाव को लेकर सत्तापक्ष की तत्परता पर आपत्ति जताई है।

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