केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने राज्य की वामपंथी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग गुरूपूजा और भारत माता की आलोचना करते हैं, वे केवल सबरीमाला के फर्जी भक्त हैं। राज्यपाल ने कहा कि अगर इन लोगों के मन में सच्ची श्रद्धा, विश्वास और भावना होती, तो खुलकर सामने आते और साफ-साफ बोलते। 

उन्होंने पूछा, ये सब विरोध क्यों किया जा रहा है? क्या केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए? ‘भारत माता’ और गुरूपूजा जैसी बातें किसी के लिए राजनीतिक हथियार नहीं हो सकतीं। यह हमारे खून, विरा और हर चीज में है। हम राजनीति से प्रेरित नहीं हैं। 

नवरात्रि से जुड़े एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि गुरूपूजा, भारत माता जैसी बातें भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि जब स्कूलों में गुरूपूजा (यानी छात्रों द्वारा शिक्षकों के पैर धोना) का विरोध हुआ, तो कुछ शिक्षकों और प्रिंसिपल ने उनसे संपर्क किया।

राज्यपाल ने कहा, मुझे हैरानी हुई कि एक ऐसे राज्य में ऐसा कैसे हो सकता है, जो सांस्कृतिक रूप से सबसे समृद्ध है? केरल की संस्कृति बहुत उच्च स्तर की है, लेकिन यहां ये सब हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक पत्रकार के साथ बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें यह सोच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से मिली है। राज्यपाल ने कहा, मैंने पत्रकार से कहा कि अगर आरएसएस राष्ट्र निर्माण और समाज को संगठित करने की बात करता है, तो इसमें गलत क्या है? राज्यपाल ने कहा कि जो कुछ देश में हो रहा है, वो देश के हित में है और हर घर तक ये संदेश पहुंचाया जाना चाहिए।

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